कविताएँ ::
मीनाक्षी मिश्र

मीनाक्षी मिश्र

नींद अब एक रंग बदलती चिड़िया है

पहले उच्छृंखल नहीं थी इतनी
देह के अहाते में उड़ती फुदकती आ ही जाती थी
अपनी अनिवार्य उपस्थिति दर्ज कराने

नींद अब एक रंग बदलती चिड़िया है
किसी दृश्य में बँधती नहीं
स्पैक्ट्रम में इसके
धूमिल रंग संलग्न हैं बहुतेरे।

मैं ध्वनियों को अब उनकी छुअन से पहचानती हूँ

शोरगुल बहुत था जीवन में
अनावश्यक बाधाएँ न उत्पन्न हों
इसलिए मैंने उसका तिरस्कार किया
बेहद संदेहास्पद थीं कुछ अन्य तरंगें
उनके उद्घाटन में मैंने समय का
अमूल्य निधि की तरह किया उपयोग

अवश्रव्य और पराश्रव्य ध्वनियों का तकनीकी पक्ष था
सो जाने दिया

भावोत्पादक थीं कुछ ध्वनियाँ
उनके के प्रति मैं बहुत सचेत रही
संगीत के प्रति तो और भी ज़्यादा
स्वर-लहरियाँ, सारिकाएँ और कारुणिक पुकारें करती रहीं
शिराओं में बहते मेरे रक्त के सूक्ष्मतम कणों को संबोधित

मैंने अपनी श्रवण-तंत्रिकाओं को इसलिए कुछ इस तरह किया प्रशिक्षित
कि केवल स्पर्शगम्य और विश्लिष्ट ध्वनियाँ रहें शेष जीवन में

बावजूद इसके अब भी वे बहुतायत में मौजूद थीं

उनमें से कुछ ही में आत्मा और श्वास थी

उन्हें बरत लेने की सलाहियत ही
मेरे औपचारिक अनौपचारिक अधिगम की असल परीक्षा रही
मेरी देह का कोई भी अंग यदि प्रतिकार करता है किसी ध्वनि तरंग का
तुरंत अस्वीकार कर देती हूँ उन्हें

मैं ध्वनियों को अब उनकी छुअन से पहचानती हूँ।

विडम्बना

जीवन में छोटी-बड़ी संदिग्धताओं से होती मुठभेड़ों को तुम कभी
अंतरिक्ष में पृथ्वी से टकराते क्षुद्र ग्रहों की
घटना की तरह देखना
इस विचित्र साम्यता का अनुभव करने पर
तुम्हें महसूस होगा कि
स्वभावगत सिद्धि का प्राप्य क्या है आख़िर
यद्यपि, अपरिहार्य हैं जटिलताएँ जीवन में

विडम्बना यह है कि सहज प्रावधानों के बावजूद
अपने अस्तित्व से जुड़ी आशंकाओं और संभावनाओं से
सदैव त्रस्त ही रहा है मनुष्य।

दुख उतने भी नहीं थे

उतना रहस्यमय भी नहीं था कुछ
जितनी थी जान लेने की उत्कटता

द्वंद्व और भय थे अंतर्निहित
पर आह्लाद, एक प्रबल आच्छादक था हृदय की व्याकुलता का

डेश़ा वू की प्रतीति हो
दुख उतने भी नहीं थे

मेरे साथ रही मेरी तन्मयता और आत्मनिष्ठ अनुभव
यात्राओं की परिणति सदैव इसीलिए गौण रही मेरे लिए

मैंने मायूसी के गर्व पर इस तरह वार किया हर बार!

मीनाक्षी मिश्र की कविताओं के किसी प्रतिष्ठित प्रकाशन स्थल पर प्रकाशित होने का यह प्राथमिक अवसर है। वह दिल्ली के एक सरकारी विद्यालय में अध्यापिका के पद पर पिछले पंद्रह वर्षों से कार्यरत हैं। उनसे meenakshi.misra84@gmail.com पर बात की जा सकती है।

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