कविताएँ ::
अमन त्रिपाठी

अमन त्रिपाठी

पहाड़ों में वसंत

मैं चाहता हूँ
पहाड़ों में वसंत
वसंत में प्रेम
और
प्रेम में तुम
उस मंदभाग्य
यात्री की तरह
जो पहाड़ों में
तोड़ने निकलता है
बुरांश का फूल।

नरक

सादी सफ़ेद दीवार
जिसे हमने अपने हाथों से रँगा था
वक़्त के ढलते सूरज के साथ
मैल की पतली चादर ओढ़ चुकी है
एक कोने पर मकड़ियों ने
उलझे जालों से कोई आर्ट रची है
तुम्हारे नाम का पहला हर्फ़
जो सब्त था इसमें एक मुद्दत से
वो किसी के नाख़ून में
मैल के साथ मिल चुका है
अब ज़मीन से डेढ़ फुट ऊपर
जहाँ A लिखा था
वहाँ सिर्फ़ नाखून के दो निशान हैं
बीच से ज़रा दाहिने की ओर
अ-समान ज़ंग लगी चार कीलें
जिनमें एक ने सँभाल रखा था
भार कैलेंडर का
आज़ाद है नए साल से
वक़्त के दामन को
इन्हीं कीलों ने थाम रखा है
इन्हीं के इर्द-गिर्द मेरी दुनिया है
मेरा नरक है
नरक मेरे लिए लोग नहीं
इन चार कीलों पर
तुम्हारी तस्वीरों का न होना है।

मेटामॉर्फ़ोसिस

क्षणिक ही सही
मुझे घिन आती है
अपने अस्तित्व पर
पलंग की चादर
जब पसीने से लग
मेरे पीठ से चिपक जाती है
दूसरे पहर
जब साँप की खोल जैसे
मैं चादर छुड़ाता हूँ
अपने पीठ से
मुझे ग्रेगोर सैमसा याद आता है
बेचैनी, बेरोज़गारी, बेगारी
अशिक्षा और आलस
चीज़ ही ऐसी है
अगर पांडव होते ये पाँच
तो नींद द्रौपदी होती
क्षणिक ही सही
घिन सबको आती है
पलंग पर पड़े इंसान को देखकर।

लिखे जाने का विषय

फेंक दिए जाते हैं
माला में पिरोए फूल

कोई नहीं सँजोता
शिवलिंग पर चढ़े बेलपत्र

प्रेम की सारी यादें
दब जाती हैं
रोज़मर्रा के कोलाहल से

प्रेम, कलियाँ, फूल, पत्तियाँ
और भविष्य…
भविष्य में लिखे जाने का
विषय हैं मात्र।

हमार गाँव

घरे कै हमरे मौसम देखा
एतना सुंदर और मनोहर
एक बगल मां गिरै करौंदा
दूजी डाली से टपकै सीकर,
एहँकी ओहंकी, चारव कैती
पेड़ई पेड़ देखात हा
बहय बयार जब बहुत सबेरे
गर्मिव मा जड़ात हा,
औ,
अम्मा- बाबा जाड़ा मा
जब बारत हेन आगी मोहारे पै
सूरज चंदा बैठ के आगी
तब तापत हेन दुआरे पै,
औ,
संझा की जब
लासुन, पालकी सोआ मेथी
पाक के मिलत हा टाठी मा
तौ, लागत हा देखा केतना
स्वाद अहय
ई गाँव के हमारे माटी मा
ई गाँव के हमारे माटी मा।


अमन त्रिपाठी की कविताओं के प्रकाशन का यह प्राथमिक अवसर है। वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर और कोरिया फ़ाउंडेशन से संबद्ध शोधार्थी रह चुके हैं। उनकी जड़ें कुण्डा, प्रतापगढ़ [उत्तर प्रदेश] में हैं। उनसे spyboy405@gmail.com पर संवाद संभव है।

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