ऐन कार्सन की कविताएँ और संवाद :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : विनोद चंदोला पिता का नीला पुराना कार्डिगन अब झूलता है वह रसोई की कुर्सी के पीछे जहाँ मैं बैठती हूँ हमेशा, जैसे वह रसोई की कुर्सी के पीछे जिस पर वे बैठते थे हमेशा। मैं पहनती हूँ उसे जब कभी आती हूँ अंदर, जैसे आते थे वे, झटकते बर्फ़ अपने जूतों से। मैं पहनती…
Browsing Category बातें
‘प्रतिलिपि’ को हमने एक मूल्य की तरह निभाया
बातें :: गिरिराज किराडू से जे सुशील
‘हम अनंत अर्थों के संसार में उपस्थित हैं’
आख़िरी बातचीत :: आग्नेय और अविनाश मिश्र
‘भक्ति अपने आपमें एक कलेक्टिव अवधारणा है’
बातें :: दलपत सिंह राजपुरोहित से जे सुशील
‘किसी किशोरवय बालक की तरह लोग हिंदी में प्रयोग करते हैं’
बातें :: डेज़ी रॉकवेल से जे सुशील
जब दो उस्ताद मिले
प्रसंग—लाओत्से और कन्फ़्यूशियस :: अँग्रेज़ी से अनुवाद और प्रस्तुति : योगेंद्र गौतम