कविताएँ :: गोविंद निषाद
डँसने के डंक अब बहुत हुए ओ सभ्यता!
लंबी कविताएँ :: वीरू सोनकर
हत्याओं के एक अंतहीन सिलसिले के बावजूद हर हत्या एक नई हत्या है
कविताएँ :: प्रदीप सैनी
गाड़ी
दुर्गा प्रसाद पंडा की कविता :: ओड़िया से अनुवाद : सुजाता शिवेन
जिन्होंने अपनी शक्लें खो दीं उन्होंने भी पाई है मंज़िल
कविताएँ :: अजय नेगी
बस हत्या ही कोई समाचार नहीं थी
कविताएँ :: कमल जीत चौधरी