लंबी कविता :: ज़ुबैर सैफ़ी
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मुनीम पहाड़िया की चलती गाड़ी में खड़े घोड़े
लंबी कविता :: आमिर हमज़ा
उलझूँ तो बस स्वयं या चंद्रमा के साथ
कविताएँ :: रिया रागिनी
उड़द दाल : दृश्य में दृश्य घुलते हैं
लंबी कविता :: कुशाग्र अद्वैत
रात में जन्म लेती हुई एक भाषा—भोर होते ही गिर जाती है समंदर में
कविताएँ :: मनीषा जोषी
कुछ नहीं बचेगा सिवा डूबने के
कविताएँ :: प्रतीक ओझा