गद्य :: बेजी जैसन
Posts tagged स्त्री विमर्श
मैं एक पत्ती को देखती हूँ और उससे अपनी आस जोड़ लेती हूँ
आन येदरलुंड की कविताएँ :: अनुवाद और प्रस्तुति : गार्गी मिश्र
हम सबको फेमिनिस्ट होना चाहिए
स्त्रीवाद और स्त्रीवादियों पर :: चिमामंडा न्गोजी अदिची अनुवाद और प्रस्तुति : यादवेंद्र
कविता मेरे अधिकारों के विषय में
जून जॉर्डन की एक कविता :: अनुवाद और प्रस्तुति : अनुराधा सिंह
रहने दो मेरी कविता को खिड़की के कांच जैसा साफ
अन्ना कामीएन्सका की कविताएं :: अनुवाद और प्रस्तुति : उपासना झा
क़मीज़
कवितावार में जेन केन्योन की कविता :: अनुवाद : आग्नेय