उगैनियस अलिशंका की कविताएँ ::
अँग्रेज़ी से अनुवाद : सरबजीत गरचा

जीवन में बस एक बार
पत्थर की चोट से दरवाज़ा खुला
जाने-पहचाने और कभी-कभार ही दिखाई पड़ने वाले
चेहरों ने एक-दूसरे का अभिवादन किया
मेज़ के सिरहाने मेहमान बेंचों पर बैठ गए
लंबी-लंबी लाल मोमबत्तियाँ जलती रहीं
हर कोई फूल लेकर आया था
किसी जनाज़े की याद हो आई
नियमित शोकार्थियों की आवाज़ सुनाई न दी
सब चुपचाप खा रहे थे
प्लेटों पर काँटे-चम्मच बजाने
और ज़्यादा पीने से बचते हुए
मैं समझ न पाया कैसे पेश आऊँ
लगा कि अपराधी हूँ
या अच्छा मेज़बान न होने के नाते
कम से कम दोषी तो हूँ ही
मैंने उन्हें नाम लेकर नहीं पुकारा
उनके बच्चों के बारे में नहीं पूछा
न मुस्कुराया
न हँसी-ठिठोली की
पहली बार बिल्कुल अपनी तरह पेश आया
आँखें बंद किए लेटा रहा
मौन
आतिथ्य में ऐसी कंजूसी पर
पछताऊँगा किसी दिन
बात यह थी कि जीवन में बस एक बार
बिना अकेले पड़े वही होना चाहता था
जो हूँ
उगैनियस अलिशंका का ख़ुद को लिखा ख़त
मैं ब्लॉज़े जैसी कविता नहीं लिख सकता
दुनिया बड़ी है
लोगों से कहीं ज़्यादा चीज़ों से भरी
लोग भी ज़्यादातर मरे हुए
फाँसी पर लटके हुए
दूसरों के कंधे स्तन माथे
महामारियाँ शवोत्खनन रंगरूट संन्यासी
कितना कुछ हो चुका है जीवन में
अकल्पनीय लगने के बावजूद हो चुका है
पढ़कर साफ़ दिखाई देता है
और मैं ब्लॉज़े जैसी कविता नहीं लिखूँगा
मेरी दुनिया छोटी है
एक झील जिससे निकलना मुमकिन नहीं
एक सड़क दो-तीन पहाड़
एक औरत जो बहुतों में है
ज़्यादातर ख़ालीपन
एक शब्द से दूसरे तक
जाता हूँ पैदल और कैसे तो गूँजती है ख़ामोशी
मैं ख़ामोशी जैसी कविता लिखूँगा
अस्वीकार्य
ज़्यादा कुछ नहीं
हर पतझर में तुम देखते हो कैसे भिड़ती है बारिश हवा से
तुम नहीं देखते कैसे फूटता है अंकुर मिट्टी और लीद से
तुम नहीं जानते कहाँ जुज़िका के आलू ख़त्म होते हैं और पेट्रियन की राई शुरू
कद्दावर कामोत्तेजक काँटे तने हैं जहाँ खेत में बना रास्ता ख़त्म होता है
और गाँव का क़ब्रिस्तान शुरू
कई क्रॉस हैं टेढ़े मानो रातोंरात उगे दाँत
दिन के उजाले में मुहाना पानी से भर जाता है
जूते कीचड़ से लिथड़ जाते हैं
रविवार को काज़ोकिश्केस के चर्चयार्ड में हाज़री
अंदर जाने की हिम्मत नहीं होती
बदबू
कैसे जीभ से जीभ लड़ती है मौन के प्रसाद को साझा करते हुए
तुम नहीं देखते प्रेमी अपने कोमल पागलपन में सुंदर
ज़रूरत ही क्या है
आँखों के लिए नहीं वह सब
तुम्हें नहीं पता कितना लोटते हैं
वे चादरों पर दाग़ छोड़ते
ज़्यादा कुछ नहीं
एक मरता हुआ आदमी लेता है विदा बिलकुल उसी तरह
बाद में खुले ताबूत में ले जाया जाता है
अपने शादी के सूट में जो पीछे से थोड़ा उधड़ा हुआ है
संतों के जीवन से
मैंने अपने वोकल कॉर्ड्स मिला लिए हैं
अब खाँसी भी मेजर की में आती है
सोची हुई हर बात अब
जीवन के साथ सुर मिला लेती है
तर्क-वितर्क विष्ठा
दशादेश स्टालिन की तिकड़ियाँ
रॉक एंड रोल की चौपाइयाँ
कविजन वेश्याएँ
यूरोप की आख़िरी महिला संत
बिना कोई किताब लिखे मर गई
पहली वाली चल बसी
बिना किसी पुरुष को जाने
ताकि मुझ जैसे पापी
तमीज़ से खाँस सकें
हथेली से मुँह ढक कर
या फिर चाक़ू से
पूरी सरगम के दौरान
पूरे जीवन के दौरान
अब मैं जो कुछ भी सोचता हूँ
इस कविता के साथ सुर मिला लेता है
ठीक-ठीक कविता नहीं
मैं अब कविताएँ नहीं लिखता
बल्कि मरे हुए खनिक की बेटी से बात करता हूँ
या एन्थ्रासाइट स्तनों को
अपनी जीभ की नोक से चाटता हूँ
या फिर बर्गामोट वाली काली चाय पीता हूँ
मानो खिड़की पर टकटकी लगाए
पर वास्तव में नहीं
कभी-कभी तुम्हारी ज़िंदगी और मेरी मौत के बीच की
वह दरार देखता हूँ
जहाँ दोनों के लिए पर्याप्त जगह है
ख़ासकर जनवरी में जब
कुछ नहीं चाहिए होता सिवाय
अंधों की सी काली आँखों लिए
काली चाय पीने के
एक-दूसरे को ताकते हुए
सफ़ेद बर्फ़ सफ़ेद काग़ज़
सफ़ेद देह देखने के
उगैनियस अलिशंका [जन्म : 1960] लिथुआनिया के सुपरिचित कवि-लेखक-अनुवादक हैं। उनके अब तक पाँच कविता-संग्रह और दो निबंध-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी रचनाओं का अँग्रेज़ी, पोलिश, स्वीडिश, रूसी, जर्मन और डच सहित अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। वर्ष 1992 में उनके कविता-संग्रह Lygiadienis [विषुव] के लिए उन्हें ज़िग्मास-गेले पुरस्कार मिला। उनके निबंध-संग्रह Dioniso sugrįžimas [डायोनिसियस की वापसी] को लिथुयानिया के संस्कृति मंत्रालय ने सम्मानित किया। उन्होंने विस्वावा शिम्बोर्स्का, कैरोलिन फोर्शे, डैनी एब्से, बर्नार्डीन एवारिस्टो, जेरोम रोथेनबर्ग, डेसमंड ईगन और याचेक पोद्सियाद्लो जैसे कई कवियों की कृतियों का अनुवाद किया है। वह विल्नियस [लिथुआनिया] में रहते हैं और विल्नियस रिव्यू के मुख्य संपादक हैं। यहाँ प्रस्तुत कविताएँ अँग्रेज़ी से हिंदी में अनुवाद करने के लिए उनके संग्रह From Unwritten Histories [न्यू यॉर्क : होस्ट पब्लिकेशन्स, 2011) से ली गई हैं, जिसका मूल लिथुएनियन से अँग्रेज़ी में अनुवाद एच.एल. हिक्स ने किया है। सरबजीत गरचा से परिचय के लिए यहाँ देखिए : मरे हुओं को बचा लो