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इसी तरह संगम एक गीत बन जाता है

स्वप्निल चक्रवर्ती की कविताएँ :: बांग्ला से अनुवाद : प्रशांत विप्लवी प्रेमी वह लड़का जो अपना सिर झुकाए निकल गया मेरा प्रेमी है। साड़ी माँगने पर चूड़ी लाता है चूड़ी माँगने पर बीस रुपये का बिंदी-पैकेट खाने की ख़्वाहिश करूँ तो मूँगफली नहीं माँगने पर सिर्फ़ चुंबन उसे अगर मैं अपने हृदय में झाँकने के लिए बोलूँ मेरे जन्म-दाग़ और तिल देखकर मुँह फेर लेता…

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नदी के किनारे दो बार रोने का कोई फ़ायदा नहीं, पहली लहर उसे पैदा करती है, दूसरी लहर उसे मिटा देती है

ग़ज़ा से कुछ कविताएँ और पत्र :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : जोशना बैनर्जी आडवानी