कविताएँ :: वियोगिनी ठाकुर
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इतना रेतीला मत करो कि समा जाऊँ गहरे भँवर में
कविताएँ :: त्रिभुवन
स्त्री के पैरों पर
कविताएँ :: प्रियंका दुबे
कम्युनिस्ट कहने से पहले लोग मुझे पागल कहा करते थे
कविताएँ :: अभिषेक सिंह
हमने ख़राब हाली में ऐसे चलन चले अब सब उधर चलेंगे जिधर को हमन चले
ग़ज़लें :: नईम सरमद
पेड़ से गिर कर मर जाती है अस्मिता
कविताएँ :: अनुज लुगुन