भुवनेश्वर के कुछ उद्धरण ::
अभिनंदन उस सलीब का होता है जो प्रतीक बन चुका
अज्ञेय के कुछ उद्धरण ::
मेरा शऊर मेरा जहन्नुम है
नज़्में :: विनीत राजा
थाम लो ज़िद का दामन
फ़रोग़ फ़ारुख़ज़ाद की कविताएँ :: अनुवाद और प्रस्तुति : सरिता शर्मा
एक चवन्नीछाप मुशायरे के बहाने
चाबुक :: तसनीफ़ हैदर
मेरे लबों को तुम्हारे ख़ूँ की तलब लगी है
नज़्में :: कायनात