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लहरें

ख़्वाब में एक नज़्म ख़ुद को देखती है और ख़्वाब से बाहर आ जाती है

in कविताएँ विश्व कविता on दिसम्बर 14, 2024 दिसम्बर 14, 2024

ज़ीशान साहिल की नज़्में :: उर्दू से लिप्यंतरण : मुमताज़ इक़बाल

टिप्पणियाँ ही बोती हैं और टिप्पणियाँ काटती हैं

in उद्धरण गद्य on दिसम्बर 13, 2024 दिसम्बर 13, 2024

लुडविग विट्गेन्स्टाइन के उद्धरण :: अनुवाद : अशोक वोहरा

रोटी की त्रिज्या पृथ्वी की त्रिज्या से हमेशा बड़ी रही है

in कविताएँ हिंदी कविता on दिसम्बर 12, 2024 दिसम्बर 12, 2024

कविताएँ :: संस्कार उषा

एक ही ज़िंदगी में

in कविताएँ हिंदी कविता on दिसम्बर 11, 2024 दिसम्बर 11, 2024

कविताएँ :: अमित भूषण द्विवेदी

घर की शर्म को घर में ही रहने दो

in कविताएँ भारतीय कविता समकालीन बांग्ला स्त्री कविता on दिसम्बर 10, 2024 अक्टूबर 28, 2025

चैताली चट्टोपाध्याय की कविताएँ :: बांग्ला से अनुवाद : जोशना बैनर्जी आडवानी

यह कैसी विडंबना है कि हमारी गर्दन पर रखे पाँव पर हम फूल चढ़ाते हैं

in कविताएँ हिंदी कविता on दिसम्बर 9, 2024 दिसम्बर 9, 2024

कविताएँ :: रूपेश चौरसिया

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