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लहरें

मैं एक वाक्य हूँ अब, तीन नुक़्तों में ख़त्म होता हुआ

in कविताएँ विश्व कविता on मार्च 14, 2023 मार्च 14, 2023

शुकरु एरबाश की कविताएँ :: तुर्की से अनुवाद : निशांत कौशिक

मैं ज़ख़्मों के बिना नहीं मरना चाहता

in उद्धरण गद्य on मार्च 13, 2023 मार्च 13, 2023

चक पॉलनीक के कुछ उद्धरण :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : निशांत कौशिक

होने के किनारों का अँधेरा घना है

in कविताएँ हिंदी कविता on मार्च 12, 2023 मार्च 12, 2023

कविताएँ :: प्रकृति करगेती

तनाव की नाटकीयता मुझे नशे में अच्छी लगी

in गद्य on मार्च 11, 2023 मार्च 11, 2023

गद्य :: निशांत कौशिक

उदास स्वरों की गलियाँ

in कविताएँ हिंदी कविता on मार्च 1, 2023 मार्च 1, 2023

कविताएँ :: ऋतेश कुमार

अंतर्विरोध के मारे पंडित प्रेम को गल्प कहते थे

in कविताएँ हिंदी कविता on फ़रवरी 10, 2023 फ़रवरी 13, 2023

कविताएँ :: सपना भट्ट

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