बातें :: बेजान मातुर से अनाहित पोतूरयान अँग्रेज़ी से अनुवाद : भरत यादव
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‘शरण ठीक हो’
बातें :: कुमार बोस से व्योमेश शुक्ल
‘समय का चक्र जैसे नदी का भँवर हो गया है’
बातें :: चंदन पांडेय से अविनाश मिश्र
‘मेरी अपेक्षाएँ ख़ुद से बहुत ज़्यादा हैं’
बातें :: व्योमेश शुक्ल से अविनाश मिश्र
‘हर सहूलत अपनी ज़ात से नई पेचीदगियों को जन्म देती है’
‘हर सहूलत अपनी ज़ात से नई पेचीदगियों को जन्म देती है’
‘मैं शायद तुम सबसे ज़्यादा ज़िंदा हूँ’
यूटी की किताबशाला में ‘नोट्स फ्रॉम दी अंडरग्राउंड’ :: प्रस्तुति : दिव्या