कविताएँ :: सौम्या बाजपेयी
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दुनिया ख़त्म होने से पहले बस एक जगह चाहिए जहाँ पहले से रखे जा सकें ट्यूलिप के कुछ फूल
कविताएँ :: ज्योति रीता
इतिहास उन्हीं का होता है जो लँगड़ाकर चलने को नृत्य कह देते हैं
कविताएँ :: प्रभात प्रणीत
फूल मुरझा नहीं रहे आजकल दम तोड़ रहे हैं झुलसकर सूर्य के अग्निकुंड में
कविताएँ :: अंजलि नैलवाल
मेरे अंदर न्याय का नवजात है
कविताएँ :: लवली गोस्वामी
मैं कल्पनाओं में इतना समय बिता चुका था कि अब कैसे मिलता और कहाँ आख़िर?
कविताएँ :: शिव कुमार गांधी