कविताएँ ::
पारुल पुखराज

निर्निमेष
उड़ गया सुग्गा
उड़ जाएगा
वसंत भी
रूप
रस
गंध
डाल निर्निमेष ताकती रहेगी
बाँध तोड़ बह जाएगा उमगा अधीर मन
अंक में तुम्हारे ही
हवा
जो लाई है
उड़ा ले जाएगी वही वसंत को
किसी चुप्पा दुपहर
पुष्प अपना उजास मद्धम कर देंगे
धूप झाइयाँ बुनने लगेगी पीठ पर
सब कुछ
सब कुछ उबाऊ
नीरस है
यहाँ तक
वासंती यह भोर भी
रचे हैं पुष्प
सुखद मलयानिल
नदी पर धूप मुखड़ा
सँवारती है
फिर भी
उचाट दिवस
शुष्क उचाट दिवस
कासे में
इत-उत डोलता
सेमल पर चील
रँगने को आतुर हाथ
रह रह काँपते
भय
कुछ न दिखेगा और
इस वसंत में
मन में
तप रहा सूर्य
वह भी
हरा
भान
अभी ठीक यहीं
मधुमालती की बेल पर
शरद की उदार भोर
पीली छाती वाली बैठी थी
नन्ही चिड़िया एक
जब तक हुआ नहीं उसे मेरा भान
जब तक एकांत को सूँघते
किसी और को भी
जाना नहीं उसने
अब देखो
अब देखो
जब थका हारा काग
संसार की सबसे ऊँची प्रतिमा पर उनींदा है
गलियों में नीरवता
खिड़की के पल्लों पर शीत का काँपता हाथ
बर्फ़ के कुछ फाहे आकाश और धरती के बीच तैरते
अनायास अलोप हो गए
बादल के चौरस धब्बे पर
चाँदनी उभर रही है
भारहीन
अधर पुष्प के
उतरती है तितली
पतझर में डाल से
पत्ता
धरा पर
स्पर्श अंकित
वक्ष पर आवाज़ के
भारहीन
गिरना
आवाज़ तो गिरती है कानों पर
शब्द
शब्द
शब्द
आवाज़ तो गिरती है
शोर
शोर
शोर
वक्ता सुनता अपना ही स्वर
जल नहीं
सिर्फ़ एक कौआ
डुगडुगी पीटता हुआ
आकाश की छाती पर मुनादियाँ
चिपका रहा
कुएँ की जगत पर
डोल में उफन आई रेत
धरा पर भस्मीभूत वृक्ष एक
भूरी पत्तियों के ढेर तक स्याह पथ
दौड़ रहा
बाड़े का पशु जीमता परछाईं राख की
जल नहीं है
शेष
देखना बंद हो गया
या दिखना
शेष हो चुके जीवन से बारजे
घेरता हुआ उन्हें घाम भी
बहुत पहले ही कहीं छूट गईं छतें
बड़े से आँगन पर आम वृक्ष की छाया
सभी दिशाओं में सन्नाटा विराजमान
देवता कानों से हथेलियाँ हटा
साँस भरते राहत की
यदा कदा
कुआर की वर्षा, बटोही के राग
भिगोते कपोत के उजले डैने
शरद की साँझ
न आह्वान कोई
न कलेजा चीरती पुकार
धूपदानी की शिथिल आँच पर एक जोड़ा लौंग
कुछ जौ चमक रहे
***
पारुल पुखराज हिंदी कवयित्री और गद्यकार हैं। उनकी कविताओं की पहली किताब साल 2015 में ‘जहाँ होना लिखा है तुम्हारा’ शीर्षक से प्रकाशित हो चुकी है। वह इन दिनों बोकारो स्टील सिटी (झारखंड) में रह रही हैं। उनसे parul28n@gmail.com पर बात की जा सकती है। इस प्रस्तुति की फ़ीचर्ड इमेज़ कवयित्री की ही कृति है।