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कवितावार में मंगलेश डबराल की कविता :: https://www.youtube.com/watch?v=8ee5XNyAsKw&feature=youtu.be इन सर्दियों में पिछली सर्दियाँ बहुत कठिन थीं उन्हें याद करने पर मैं इन सर्दियों में भी सिहरता हूँ हालाँकि इस बार दिन उतने कठोर नहीं पिछली सर्दियों में मेरी माँ चली गई थी मुझसे एक प्रेमपत्र खो...
कवितावार में ध्रुव शुक्ल की कविता :: चीटियों को देखते हुए चली आ रही है धरती पर निर्भय कविता कविता के पीछे कविता साथ छोड़ती नहीं किसी का धरती के भीतर रखकर शब्दों के अंडे बार-बार आती है बाहर चला आ रहा कविता के पीछे शब्दों का जूलूस धरती के...
कवितावार में सुल्ली प्रुदोम की कविता :: फ़्रेंच से अनुवाद : रीनू तलवाड़ टूटा फूलदान वह फूलदान मुरझा रहा है जिसमें वर्बीना हाथ पंखे से लग कर टूटा था; हालाँकि हाथ पंखे ने छुआ भर होगा : क्योंकि कोई आवाज़ न हुई। मगर वह हल्की-सी चोट...
कवितावार में जॉन मिल्टन की कविता :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : रीनू तलवाड़ और प्रचण्ड प्रवीर सॉनेट 19 : जब मैं विचारता हूँ किस तरह मेरा आलोक व्यय हुआ जब मैं विचारता हूँ किस तरह मेरा आलोक व्यय हुआ जीवन आधा बीतने से...
कवितावार में विलियम बटलर येट्स की कविता :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : प्रचण्ड प्रवीर जब तुम उम्रदराज़ होगी जब तुम उम्रदराज़ होगी और थकी और नींद से भरी अलाव के पास सिर हिलाती हुई, इस किताब को उठाना और धीरे से पढ़ना और कोमल...
कवितावार में पॉल वेरलेन की कविता :: फ़्रेंच से अनुवाद : मदन पाल सिंह रोज़मर्रा के उबाऊ सरल कामों में लगा नम्र जीवन रोज़मर्रा के उबाऊ सरल कामों में लगा नम्र जीवन अपना स्वयं के चुनाव का कार्य है जिसे बहुत प्रेम चाहिए, त्रस्त...