कवितावार में शार्ल बॉदलेयर की कविता ::
फ़्रेंच से अनुवाद : मदन पाल सिंह

शार्ल बॉदलेयर

तस्वीर

बीमारी और मौत दोनों कर देती हैं ख़ाक
—उस ज्योति को जिससे चमका था हमारा जीवन
—भरपूर उत्साह से भरी उन प्यारी-मधुर आँखों को
—और उस मुख को जहाँ मेरा हृदय डूब गया था,
—उन चुम्बनों को भी जो मरहम की तरह हरते थे पीड़ा
और उनकी प्यास, चपलता
सूर्य की किरणों से भी अधिक तीव्र थी,
अब बाक़ी क्या शेष रहा!
बस यही कि एक मैला-कुचला, ज़र्द अक़्स
—बस इन्हीं तीन रंगों का चित्र!

कौन मेरी तरह नीरव एकांत में मौत की ओर जा रहा है
और काल—वह घृणित बूढ़ा आदमी
अपने कठोर-खुरदुरे डैने से घिस रहा है
मुझे हर दिन…

हे काल!

जीवन और कला के स्याह, दारुण हत्यारे तुम
मेरी स्मृति में कभी नहीं मार सकोगे उसे
जो मेरा यश-गर्व औ’ अनुराग-उमंग थी।


शार्ल बॉदलेयर (1821–1867) संसारप्रसिद्ध फ़्रेंच कवि हैं। यहाँ प्रस्तुत कविता ‘फ़्रांसीसी कविता : प्रतीक और कविता’ (लेखन एवं अनुवाद : मदन पाल सिंह, संभावना प्रकाशन, हापुड़) से साभार है। मदन पाल सिंह भारत और फ़्रांस में शिक्षित हिंदी लेखक और अनुवादक हैं। इस प्रस्तुति से पूर्व उनके अनुवाद में आर्तच्युर रैम्बो, पॉल वेरलेन और स्टीफेन मलार्मे की कविताएँ ‘सदानीरा’ पर प्रकाशित हो चुकी हैं।

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