फ़रोग़ फ़ारुख़ज़ाद की कविताएँ :: अनुवाद और प्रस्तुति : सरिता शर्मा
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एक चवन्नीछाप मुशायरे के बहाने
चाबुक :: तसनीफ़ हैदर
मेरे लबों को तुम्हारे ख़ूँ की तलब लगी है
नज़्में :: कायनात
मैं अब और नहीं लड़ सकती
पति को पत्र :: वर्जीनिया वुल्फ अनुवाद और प्रस्तुति : अमित तिवारी
प्रेम की प्राप्ति के लिए
एरिक फ्राम के कुछ उद्धरण :: अनुवाद : युगांक धीर
प्यार? प्यार सुबह की धुंध सरीखा है
चार्ल्स बुकोवस्की की कविताएँ :: अनुवाद और प्रस्तुति : रंजना मिश्र