हरमन हेस के कुछ उद्धरण :: अनुवाद : सरिता शर्मा
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मेरा शऊर मेरा जहन्नुम है
नज़्में :: विनीत राजा
थाम लो ज़िद का दामन
फ़रोग़ फ़ारुख़ज़ाद की कविताएँ :: अनुवाद और प्रस्तुति : सरिता शर्मा
एक चवन्नीछाप मुशायरे के बहाने
चाबुक :: तसनीफ़ हैदर
मेरे लबों को तुम्हारे ख़ूँ की तलब लगी है
नज़्में :: कायनात
मैं अब और नहीं लड़ सकती
पति को पत्र :: वर्जीनिया वुल्फ अनुवाद और प्रस्तुति : अमित तिवारी