चाबुक :: तसनीफ़ हैदर
Posts tagged अनुवाद
मेरे लबों को तुम्हारे ख़ूँ की तलब लगी है
नज़्में :: कायनात
मैं अब और नहीं लड़ सकती
पति को पत्र :: वर्जीनिया वुल्फ अनुवाद और प्रस्तुति : अमित तिवारी
प्रेम की प्राप्ति के लिए
एरिक फ्राम के कुछ उद्धरण :: अनुवाद : युगांक धीर
प्यार? प्यार सुबह की धुंध सरीखा है
चार्ल्स बुकोवस्की की कविताएँ :: अनुवाद और प्रस्तुति : रंजना मिश्र
मैं चाहती हूँ, मेरे उरोज तुम्हें उत्तेजित कर दें
जॉयस मन्सूर की कविताएँ :: अनुवाद और प्रस्तुति : अखिलेश सिंह