कोलेट के कुछ उद्धरण :: अनुवाद : सरिता शर्मा
उदासियों से भर गए हैं बारिशों में धुले हुए दिन
कविताएँ और तस्वीरें :: सुमेर
एक धोखेबाज़ की तरह जीना मुझे हमेशा से मंज़ूर था
कविताएँ :: शचीन्द्र आर्य
मैं अभ्यस्त हूँ इन तमाम कामों की
कविताएँ :: अंकिता शाम्भवी
हे देव, मुझे घने जंगल की नागरिकता दो!
कविताएँ :: जोशना बैनर्जी आडवानी
मेरा क़सूर यह है कि लोग मुझे पढ़ते हैं
शरद जोशी के कुछ उद्धरण ::