कविताएँ :: यशस्वी पाठक
मैंने ख़ुद को वैसे देखा जैसे दूसरे मुझे देखते थे और मैंने अपने आपसे नफ़रत करना शुरू कर दिया
फ़र्नांदो पेसोआ की डायरी :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : आसित आदित्य
मेरी प्रेम-कविता में नदी, पेड़ और पहाड़ नहीं हैं
कविताएँ :: दीपक सिंह
घर कभी नहीं चाहता उन लोगों पर गिरना जो उसमें रहते हों
कविताएँ :: शहबाज़ रिज़वी
संपूर्ण की भाँति क्षणभंगुर
मारिएला कॉरडेरो की कविताएँ :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : देवेश पथ सारिया
नहीं भी सही जगह इस्तेमाल हो तो बच जाती हैं घटित होने से कई त्रासदियाँ
कविताएँ :: शचीन्द्र आर्य