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लहरें

घर बदसूरत होते हैं—नक़ल की नक़ल

in उद्धरण गद्य on अप्रैल 15, 2025 अप्रैल 15, 2025

मारियो वार्गास ल्योसा के उद्धरण :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : सरिता शर्मा

इन पगडंडियों का अकेलापन सभ्यताओं का अकेलापन है

in कविताएँ हिंदी कविता on अप्रैल 12, 2025 अप्रैल 12, 2025

कविताएँ :: पूजा जिनागल

अपभ्रंश का क़बीला—एक असमाप्त कविता

in कविताएँ हिंदी कविता on अप्रैल 11, 2025 अप्रैल 11, 2025

कविता :: अजंता देव

‘बाबुल की दुआएँ लेती जा…’ जैसे गीत बेटियों को मूर्ख बनाने के लिए लिखे गए

in कविताएँ हिंदी कविता on अप्रैल 10, 2025 अप्रैल 10, 2025

कविताएँ :: यशस्वी पाठक

मैंने ख़ुद को वैसे देखा जैसे दूसरे मुझे देखते थे और मैंने अपने आपसे नफ़रत करना शुरू कर दिया

in उद्धरण गद्य on अप्रैल 9, 2025 अप्रैल 9, 2025

फ़र्नांदो पेसोआ की डायरी :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : आसित आदित्य

मेरी प्रेम-कविता में नदी, पेड़ और पहाड़ नहीं हैं

in कविताएँ हिंदी कविता on अप्रैल 8, 2025 अप्रैल 8, 2025

कविताएँ :: दीपक सिंह

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COPYRIGHT © 2013-2025. सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पत्रिका का कोई भी हिस्सा किसी भी रूप में या किसी भी माध्यम, जिसमें सूचना संग्रहण और सूचना संसाधन की विधियाँ सम्मिलित हैं, द्वारा प्रकाशक अथवा संपादकों की पूर्वानुमति के बिना पुनरुत्पादित नहीं किया जा सकता सिवाय एक समीक्षक के जो समीक्षा में संक्षिप्त अंशों को उद्धृत कर सकता है। प्रकाशित रचनाओं का कॉपीराइट लेखकों/अनुवादकों/कलाकारों का है।

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