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लहरें

‘बाबुल की दुआएँ लेती जा…’ जैसे गीत बेटियों को मूर्ख बनाने के लिए लिखे गए

in कविताएँ हिंदी कविता on अप्रैल 10, 2025 अप्रैल 10, 2025

कविताएँ :: यशस्वी पाठक

मैंने ख़ुद को वैसे देखा जैसे दूसरे मुझे देखते थे और मैंने अपने आपसे नफ़रत करना शुरू कर दिया

in उद्धरण गद्य on अप्रैल 9, 2025 अप्रैल 9, 2025

फ़र्नांदो पेसोआ की डायरी :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : आसित आदित्य

मेरी प्रेम-कविता में नदी, पेड़ और पहाड़ नहीं हैं

in कविताएँ हिंदी कविता on अप्रैल 8, 2025 अप्रैल 8, 2025

कविताएँ :: दीपक सिंह

घर कभी नहीं चाहता उन लोगों पर गिरना जो उसमें रहते हों

in कविताएँ हिंदी कविता on अप्रैल 3, 2025 अप्रैल 3, 2025

कविताएँ :: शहबाज़ रिज़वी

संपूर्ण की भाँति क्षणभंगुर

in कविताएँ विश्व कविता on अप्रैल 2, 2025 अप्रैल 2, 2025

मारिएला कॉरडेरो की कविताएँ :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : देवेश पथ सारिया

नहीं भी सही जगह इस्तेमाल हो तो बच जाती हैं घटित होने से कई त्रासदियाँ

in कविताएँ हिंदी कविता on अप्रैल 1, 2025 अप्रैल 1, 2025

कविताएँ :: शचीन्द्र आर्य

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COPYRIGHT © 2013-2025. सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पत्रिका का कोई भी हिस्सा किसी भी रूप में या किसी भी माध्यम, जिसमें सूचना संग्रहण और सूचना संसाधन की विधियाँ सम्मिलित हैं, द्वारा प्रकाशक अथवा संपादकों की पूर्वानुमति के बिना पुनरुत्पादित नहीं किया जा सकता सिवाय एक समीक्षक के जो समीक्षा में संक्षिप्त अंशों को उद्धृत कर सकता है। प्रकाशित रचनाओं का कॉपीराइट लेखकों/अनुवादकों/कलाकारों का है।

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