अमोस ओज़ के कुछ उद्धरण :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : सरिता शर्मा
इस देश का विशालकाय मुँह दर्द में भिंचा हुआ है
जयंत महापात्र की कविताएँ :: अनुवाद और प्रस्तुति : शिवम तोमर
हम आजकल सहन नहीं कर पाते दूसरों का मत, क्षमा कीजिए हज़रत
क़ाज़ी नज़रुल इस्लाम की कविताएँ :: बांग्ला से अनुवाद : सुलोचना वर्मा
‘हम अनंत अर्थों के संसार में उपस्थित हैं’
आख़िरी बातचीत :: आग्नेय और अविनाश मिश्र
मैं पेड़ नहीं, इसका अर्थ बनना चाहता हूँ
ओरहान पामुक के कुछ उद्धरण :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : सरिता शर्मा
एक मुट्ठी जुगनुओं का प्रकाश लेकर ख़ाली मैदान में जादू दिखा रहा है अंधकार
पूर्णेंदु पत्री की कविताएँ :: बांग्ला से अनुवाद : सुलोचना वर्मा