शक्ति चट्टोपाध्याय की कविताएँ :: बांग्ला से अनुवाद : रोहित प्रसाद पथिक
अब तक मुझे हराए रखा है तुम्हारी ताक़त ने नहीं, तुम्हारी दहशत ने
सलमा की कविताएँ :: अनुवाद : जे सुशील
पुरातत्त्ववेत्ता भरभराकर रो पड़ेगा उसमें बची जीवटता देखकर
कविताएँ :: नीरज
जन्म के वक़्त मैं रोई थी किस भाषा में अब याद नहीं, पर वही थी शायद मेरी भाषा
कविताएँ :: मनीषा जोषी
धीरे-धीरे क़ैद हो जाएगा पूरा संसार एक चुप्पी में
कविताएँ :: महिमा कुशवाहा
दुनिया नहीं बोलती—यहाँ—सिर्फ़ दुनिया की पुरानी आदतें बोलती हैं
कविताएँ :: संदीप रावत