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लहरें

इसी तरह संगम एक गीत बन जाता है

in कविताएँ विश्व कविता on अप्रैल 15, 2026 अप्रैल 24, 2026

स्वप्निल चक्रवर्ती की कविताएँ :: बांग्ला से अनुवाद : प्रशांत विप्लवी

निहत्थे लोग हथियार बन जाते हैं

in कविताएँ हिंदी कविता on अप्रैल 14, 2026 अप्रैल 14, 2026

कविताएँ :: वसुंधरा यादव

पृथ्वी पर कोई पाठक शेष न था शेष थे मात्र अधूरे छंद

in कविताएँ हिंदी कविता on अप्रैल 3, 2026 अप्रैल 3, 2026

कविताएँ :: कुशाग्र मिश्र

शवों पर होती निरर्थक धन और पुष्पवर्षा नहीं हूँ मैं

in कविताएँ हिंदी कविता on मार्च 31, 2026 मार्च 31, 2026

कविताएँ :: विनय चौधरी

माँ और इस दुनिया के बारे में हुईं कई कविताओं में से कुछ कविताएँ

in कविताएँ हिंदी कविता on मार्च 26, 2026 मार्च 26, 2026

कविताएँ :: राजेश कमल

बाबा मेरे लिए किसी को इंतिख़ाब करने से पहले

in कविताएँ हिंदी कविता on मार्च 25, 2026 मार्च 25, 2026

कविताएँ :: गोसिया बानो

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