कविताएं :: प्रीति सिंह परिहार
Posts tagged स्त्री विमर्श
सोचना खुद में ही खतरनाक है
हाना आरेन्ट के कुछ उद्धरण :: अनुवाद : सरिता शर्मा
मेरी लहूलुहान उंगलियां भरती रहीं तुम्हारी तिजोरियां
रियानो गिडन्स का एक गीत :: अनुवाद और प्रस्तुति : यादवेंद्र
लोगों को बचाया नहीं जा सकता है, उनसे सिर्फ प्यार किया जा सकता है
अनाइस नीन के कुछ उद्धरण :: अनुवाद और प्रस्तुति : सरिता शर्मा
डूबती शामों के नीले आसमान के लिए
कविताएं :: शुभम श्री
मैं देश हो गई
कविताएं :: अंकिता आनंद