कविताएँ :: राजेश कमल
Posts tagged विचार
भूख पर कविता उतनी अधूरी रह जाती है जितना भूख में कवि होना
कविताएँ :: उज्ज्वल शुक्ल
मैं दबाकर रखी गई चीख़ हूँ जो तुम्हें बावला कर सकती है
कविताएँ :: यशस्वी पाठक
मैं भूल गया था—मेरा रक्त ही मेरा मूल धर्म है
कविताएँ :: आशुतोष प्रसिद्ध
हम ईश्वर के लिए लालायित रहते हैं, क्योंकि मनुष्य सतत प्रार्थना है
यून फ़ुस्से के कुछ उद्धरण :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : सरिता शर्मा
मैं घर के साथ सोते-जागते अँधेरे की हो गई हूँ
कविताएँ :: आंशी अग्निहोत्री