फ़रोग़ फ़ारुख़ज़ाद की कविताएँ :: अनुवाद : उपासना झा
Posts tagged अनुवाद
नया अंक : वर्ष 11, अंक 30
क्रम :: ग्रीष्म 2024 समकालीन बांग्ला स्त्री कविता
नहर से बहर तक—फ़्रॉम द रिवर टू द सी
सामिर अबु हव्वाश की कविता :: अनुवाद : रेयाज़ुल हक़
वहाँ कभी नहीं जाना चाहिए, जहाँ से जाते हुए तकलीफ़ न हो
एकाग्र :: राही डूमरचीर कविताएँ | कथाएँ | तस्वीरें | अनुवाद
घोड़े तब तक अधीन हैं जब तक वे दौड़ सकते हैं
एक रात की याद में राख हो जाता है फूल
म्याओ-यी तू की कविताएँ :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : देवेश पथ सारिया