बातें :: कुमार बोस से व्योमेश शुक्ल
मेरी क्षीण होती काया से फूल उगेंगे
एडवर्ड मुंच के कुछ उद्धरण :: अँग्रेज़ी से अनुवाद और प्रस्तुति : नीता पोरवाल
राजस्थान
कविताएँ और तस्वीरें :: रुस्तम
‘समय का चक्र जैसे नदी का भँवर हो गया है’
बातें :: चंदन पांडेय से अविनाश मिश्र
‘मेरी अपेक्षाएँ ख़ुद से बहुत ज़्यादा हैं’
बातें :: व्योमेश शुक्ल से अविनाश मिश्र
मैं कविता के रूप में ऊपर उठूँगी
मरीना त्स्वेतायेवा के कुछ उद्धरण :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : सरिता शर्मा