चिट्ठियां :: बाबुषा कोहली
शोर और इश्तहार से बचकर
अजंता देव की कविताओं पर :: दीपशिखा
जहां खंडित प्रतिमाएं भी पूजी जाती हैं
सफर :: अजंता देव
इन दिनों उदासी कोई हीर है
कविताएं :: सुधांशु फ़िरदौस
मेला, मंच, हिंदी पट्टी और कुछ दूसरी चिंताएं
रफ नोट्स : पटना पुस्तक मेला-2017 :: अंचित
मैं पानी और आग नहीं बनना चाहती
पोलिना बर्स्कोवा की दो कविताएं :: अनुवाद और प्रस्तुति : विपिन चौधरी