ईब आले ऊ या यूँ कहूँ कि कविता में हूँ

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चित्रकथाएँ ::
गार्गी मिश्र

जब कोई ‘कविता क्या है?’ पर रोज़ ज्ञान दे :

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जब कोई कविता की आलोचना पर बहुत ज्ञान दे दे :

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कविता में छंद पर कवियों की बहस सुनते हुए :

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अब कौन-सी चाल चलूँ? छंद वग़ैरह तो हो गया :

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कवियों में भाई-भतीजावाद! Nepotism is everywhere bro… :

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कवि जिसने छद्म नामों से कविताओं की बमबारी कर दी! अच्छा किंतु ख़ुराफ़ाती कवि :

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‘भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार’ की घोषणा पर सु-कवि :

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ख़ुद को आउटसाइडर बताता कवि कि उसे उसकी कविता से नहीं जाति से पहचाना गया : 

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अपने काव्य-शिल्प को सु-कवि की प्रशंसा के रूप में प्रस्तुत करने वाली स्त्री कवि :

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समकालीन कविता पर बात करते हुए स्त्री कवियों का नाम बहुत मुश्किल से याद करता कवि : 

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कविता की दुनिया को ठेंगे पर रखने वाला कवि। दरअसल कवि :

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अनूदित कवि और अ-अनूदित कवि :

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अपने कविता-संग्रह/उपन्यास/कहानी-संग्रह या किसी भी संग्रह पर किसी महत्त्वपूर्ण कवि/उपन्यासकार/कहानीकार या आलोचक से टिप्पणी की आशा करता/करती कवि/लेखक : 

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यूरोपियन कवियों की कविता को सराहने पर चंद भारतीय कवि : 

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गुरु जी की कविता को महाकाव्य बताता हिंदी विभाग का कवि :

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काव्य-गोष्ठियों में आमंत्रित अ-कवि :

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हिंदी कविता संसार को दूर से देखता अन्य भाषा (रीजनल पोएट) का भारतीय कवि : 

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सोशल मीडिया से दूर रहने वाला कवि :

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संस्थाओं का कवि :

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कवियों के चमचे कवि : 

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सत्यान्वेषी पर्यटक कवि : 

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ललित-निबंधकार, संपादक और अध्यापक कवि :

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काव्य-संसार में काव्य को बचाए रखने वाला कभी तिरस्कृत तो कभी सम्मानित पूर्वज कवि : 

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स्पिरिचुअली एनलाइटेंड और धार्मिक गुरुओं को कोट करने वाला/वाली लाइफ़कोचनुमा कवि :

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आत्ममुग्ध कवि  :

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कवियों में गुटबाज़ी :

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कवियों के भाग्य बाँचने वाला/वाली ज्योतिष कवि :

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अधिकतर विदेश की यात्राओं में व्यस्त रहने वाला और देश में स्वीकृति चाहने वाला कवि : 

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कवि टर्न्ड आलोचक कवि :

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पुरस्कृत कवि :

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किसी एक कवि में समूचा संसार देखने वाला नतमस्तक कवि : 

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कवि टर्न्ड विमर्शकार कवि :

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कवि के रिश्तेदार कवि : 

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कवि टर्न्ड नाटककार कवि और कवि टर्न्ड फ़िल्मकार कवि :

 

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प्रगतिशील कवि : 

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संपादकों का कवि :

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कवियों के प्रकाशक कवि : 

गार्गी मिश्र के यहाँ प्रस्तुत काम पर मशहूर कवि-लेखक कृष्ण कल्पित की टिप्पणी :

यदि समकालीन-हिंदी-कविता के वर्तमान-हाल के बारे में आपमें किंचित भी उत्कंठा हो तो आपको बनारस की गार्गी मिश्र का यह काम देखना चाहिए। यहाँ व्यंग्य, वक्रोक्ति और वाग्मिता की त्रिवेणी बह रही है, जहाँ कवि कपि में और कपि कवि में बदल गया है। यह रूपांतरण/कायांतरण/Metamorphosis किसी उत्कृष्ट आधुनिक मेधा के बिना संभव नहीं था। कमाल का काम!

इस प्रस्तुति में प्रयुक्त तस्वीरें गूगल से साभार। ‘ईब आले ऊ’ के संदर्भ के लिए यहाँ देखें : ईब आले ऊ

सदानीराhttps://sadaneera.com/
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3 टिप्पणी

  1. शब्द संयोजन के साथ छवियों का तुलनात्मक विवेचन तारीफ योग्य है। अच्छा प्रयास है ।ध्यान से पढ़ा भी और हंसा भी।

  2. कमाल का काम है ।वर्तमान जितनी कल्पनाएं कवियों के बारे में की जा सकती हैं और जिनते प्रकार के कवि चहुं और विचरते हैं आजकल ,सभी तो हैं यहां ।
    जबरदस्त

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