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कवितावार में टेड ह्यूज़ की कविता ::
अँग्रेज़ी से अनुवाद : अनुराधा सिंह 

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टेड ह्यूज़

बाज़ बसेरा

बैठा हूँ अरण्य शीर्ष पर :
निमीलित नयन, निश्चेष्ट।
मेरे नत अंकुशाकार शीश और अंकुशाकार पंजों के मध्य
किसी मिथ्या स्वप्न का स्थान नहीं।
नींद में भी करता हूँ दक्ष आखेट और आहार का अभ्यास।

उन्नत वृक्षों का सुभीता,
प्रफुल्ल वायु और सूर्य की किरणें
अनुकूल हैं मेरे।
पृथ्वी है मेरे ही निरीक्षण हेतु उर्ध्वमुखी।

रूक्ष तने पर कसे हैं मेरे पाँव।
मेरे पाँवों और एक-एक पंख के सृजन में
खप गई है समूची सृष्टि।
अब अपने पाँवों में ही सम्हाले हूँ मैं सृष्टि।

ऊँचा उड़ता हूँ, घूमती है पृथ्वी मेरे सम्मुख मंथर
जिसे चाहता हूँ मारता हूँ क्योंकि सब है मेरा ही।
मिथ्या विवाद नहीं मेरी प्रवृत्ति
मेरा दस्तूर सिर को धड़ से अलग कर देना है।

मृत्यु का आवंटन :
स्पष्ट उद्देश्य है मेरी उड़ान का
जो प्राणियों की अस्थियों से होकर गुज़रती है।
मेरी सत्ता पर किसी तर्क का ज़ोर नहीं।

सूर्य मेरे पार्श्व में है।
मेरे उद्भव से अब तक कुछ नहीं बदला है।
आँखों ने किसी परिवर्तन की अनुमति नहीं दी है।
मैं चीज़ों को यथावत् रखूँगा।

***

टेड ह्यूज़ (17 अगस्त 1930-28 अक्टूबर 1998) अँग्रेज़ी कविता के समादृत हस्ताक्षर हैं। यहाँ प्रस्तुत कविता हिंदी अनुवाद के लिए owlcation.com पर प्रकाशित आलेख Analysis of the Poem ‘Hawk Roosting’ by Ted Hughes से ली गई है। अनुराधा सिंह हिंदी की सुपरिचित कवयित्री और अनुवादक हैं। कवि की तस्वीर : Henri Cartier-Bresson

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