सबने चुना रास्ता… मैंने प्रेम

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कविताएँ ::
सोनू यशराज

सोनू यशराज

मैं तुम्हें प्यार करता हूँ नाद्या
चेखव की कहानी ‘छोटा-सा मज़ाक़’ की नाद्या के लिए

महज़ शब्द थे
जो उछाले गए तुम्हारे कानों में हर बार
उन्हीं शब्दों के सहारे
अपरिचित संभावनाओं के मध्य झूलती
पहाड़ी कगार से नीचे मैदान तक
जाने कितनी बार तुमने
डर को जीता प्रेम की आस में—
बर्फ़ में लुढ़कते हुए
सैकड़ों बार रुक गई साँस तुम्हारी
पर वह आस नहीं

सबने चुना रास्ता… मैंने प्रेम

तुम्हारे पास भाषा थी
मेरे पास प्रेम
मौन पसरा था
शब्दों के मध्य
जैसे पटरी पर पड़े सिक्के
इंतज़ार में हों रेल के

सच्चा झूठ

उन्होंने पेड़ के तनों को छीलकर ख़ंजर बना लिए
मैं फिर से फूल उगाने की कोशिश में जुटी रही

जब वे उन ख़ंजरों से ख़त्म करने लगे मेरी दुनिया
मैं फूल से मरहम बनाने लगी

जब वे रोटियाँ सेंक रहे थे अपनी कारगुज़ारियों पर
तब मेरे हाथ जले आग बुझाते-बुझाते

उन्होंने फिर से कुछ पेड़ छीलने की कोशिश की
पर अब मेरे पास हाथ नहीं थे

खब्बू

बाएँ गाल पर तिल वाली लड़की
मानी जाती है सुंदर और सौभाग्यवती

बाएँ हाथ से हर काम करती नई दुल्हन को
मिलती है ससुराल की तिरछी नज़र

बाएँ पैर को पहले आगे बढ़ाती गर्भवती स्त्री की चाल
बाँच देती है मनु के कुछ अलिखित नियम

बाईं कमर पर लचक खाई एक औरत
देर तक निहारती है कान्हा की त्रिभंगी मुद्रा

बाएँ कंधे के दर्द को सहलाती स्त्री
दर्ज करती है विद्रोह कविता के पन्ने पर

बाएँ को मिली हर गाली जमा होती रही है
सदियों से स्त्री के खाते में

बाएँ हाथ में मौली बँधवाती स्त्री
मुस्कुराकर छोड़ देती है चावल—
दाएँ हाथ की मुट्ठी से

सोनू यशराज की कविताएँ पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। उनसे sonuyashraj5@gmail.com पर बात की जा सकती है।

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