सुमम थॉमस की एक कविता :: मलयालम से अनुवाद : बाबू रामचंद्रन और बेजी जैसन
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मेरी क्षीण होती काया से फूल उगेंगे
एडवर्ड मुंच के कुछ उद्धरण :: अँग्रेज़ी से अनुवाद और प्रस्तुति : नीता पोरवाल
मैं कविता के रूप में ऊपर उठूँगी
मरीना त्स्वेतायेवा के कुछ उद्धरण :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : सरिता शर्मा
अटारी और उसकी कीलें
नाओमी शिहाब नाइ की कविताएँ :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : पल्लवी व्यास
मैं भारतीय नागरिक प्रमाणित होने से इनकार करता हूँ
आलेख :: माज़ बिन बिलाल
‘हर सहूलत अपनी ज़ात से नई पेचीदगियों को जन्म देती है’
‘हर सहूलत अपनी ज़ात से नई पेचीदगियों को जन्म देती है’