कविताएँ :: शचीन्द्र आर्य
Posts tagged लोक
वे रास्ते सीधे नहीं हैं जिन रास्तों से तुम एक भूख, एक नींद, एक दिन के उद्देश्य की व्याख्या करते हो
समीर ताँती की कविताएँ :: असमिया से अनुवाद : कल्पना पाठक
अंतहीन यात्रा के सहयात्री
कविताएँ :: सोनी पांडेय
खिड़की से देखती रही दुनिया, खिड़की भर ही देख पाई
कविताएँ :: अनुपम सिंह
दुनिया को जान लेना दुनिया को मान लेने से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक हो सकता है
कविताएँ और तस्वीरें :: ओसामा ज़ाकिर
प्रेम में नहीं रहा तो कहाँ रहूँगा
कविताएँ :: पंकज मिश्र