कविताएँ :: मैट रीक
Posts tagged विश्व कविता
पारदर्शिता इतनी भी ज़रूरी नहीं
सुमना रॉय की कविताएँ :: अनुवाद : कनक अग्रवाल और ऋतुपर्णा सेनगुप्ता
नया अंक : वर्ष 10, अंक 28
क्रम :: वसंत 2023 वेस्टलैंड
मैं इस बात को नहीं मानता कि इश्क़ इंसान को सब कुछ देता है
साबीर हाका की कविताएँ :: फ़ारसी से अनुवाद : अ’ब्दुल वासे’
मैं एक वाक्य हूँ अब, तीन नुक़्तों में ख़त्म होता हुआ
शुकरु एरबाश की कविताएँ :: तुर्की से अनुवाद : निशांत कौशिक
लाखों मारे गए, जबकि हर कोई निर्दोष था
चार्ल्स सिमिक की कविताएँ :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज