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'प्रकाश' प्रसंग :: निशांत एक प्रकाश के दोनों कविता-संग्रह किताबों की रैक से झाँक रहे हैं। बाहर कालच्छा बादल है। नमी है मौसम में। रिमझिम-रिमझिम बारिश हो रही है। खिड़की से सब धुँधला-धुँधला दिख रहा है। प्रकाश के दूसरे संग्रह को निकालता...
व्यंग्य :: इब्न-ए-इंशा लिप्यंतरण : निशांत कौशिक फ़ैज़ और मैं बड़े लोगों के दोस्तों और हमजलीसों (हमजोली, गहरे मित्र) में दो तरह के लोग होते हैं। एक वो जो इस दोस्ती और हमजलीसी का इश्तेहार दे कर ख़ुद भी नामवरी हासिल करने की...
संस्मरण :: अविनाश मिश्र ‘प्रेम’ प्रसंग एक मृत्यु एक मनुष्य को एक नए सिरे से समझने का अवसर है। एक मृत्यु बहुत कुछ समझा सकती है, बशर्ते वह आपकी अपनी न हो। यह भी है कि किसी के न रहने की दूरी में...
स्मृति-लेख :: सुधांशु फ़िरदौस आदमी क्या खोता है और क्या पाता है, यह उसके मन और आत्मा से निर्धारित होता है। — शशिभूषण द्विवेदी शशिभूषण द्विवेदी नहीं रहे... इस सूचना के लिए जो भी उनको ज़रा भी क़रीब से जानता था, उसने अपने...
गद्य :: शैलेंद्र साहू तस्वीरें :: राजकुमार साहनी वह बहुत दिनों से बस ऐसे ही आलसी सूअर की तरह पड़ा हुआ था—बिस्तर पर लोटते हुए, दरवाज़े के पास पड़े उस चमड़े के एक जोड़ी जूते की तरह जिसे हम बिसरा चुके...
सफ़र :: आदित्य शुक्ल विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास पढ़ते हुए ऐसा लगता है मानो इस पृथ्वी पर सिर्फ़ सुंदरता ही सुंदरता हो, मानो अन्याय और पीड़ा और शोषण इस पृथ्वी पर कहीं हो ही नहीं। वह ऐसे शिल्पकार हैं जिनके...