प्रोमिला मन्हास की कविताएँ :: डोगरी से अनुवाद : कमल जीत चौधरी
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अब तक मुझे हराए रखा है तुम्हारी ताक़त ने नहीं, तुम्हारी दहशत ने
सलमा की कविताएँ :: अनुवाद : जे सुशील
जन्म के वक़्त मैं रोई थी किस भाषा में अब याद नहीं, पर वही थी शायद मेरी भाषा
कविताएँ :: मनीषा जोषी
दुनिया नहीं बोलती—यहाँ—सिर्फ़ दुनिया की पुरानी आदतें बोलती हैं
कविताएँ :: संदीप रावत
मेरी समझ से परे है आज की प्रेम-कविता आज से पहले की भी और सबसे पहली प्रेम-कविता भी
कविताएँ :: अभिजीत
मेरे पास विदा का कोई समुचित वाक्य नहीं
कविताएँ :: पंकज प्रखर