प्रभा गणोरकर की कविताएँ :: मराठी से अनुवाद : सुनीता डागा
Posts tagged स्त्री विमर्श
वह स्त्री जिसके गीतों का न आग़ाज़ था न अंत
दुन्या मिखाइल की कविताएँ :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : देवेश पथ सारिया
वह कहती है उसके अंदर बहुत सारी औरतें हैं
कविताएँ :: आरती हजाम
कभी-कभी दुनिया छोटी करके भी किया माफ़
कविताएँ :: अंशिका निरंजन
रातरानी की महक सिर्फ़ रातरानी से उतरती है
कविताएँ :: वियोगिनी ठाकुर
स्त्री के पैरों पर
कविताएँ :: प्रियंका दुबे