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लहरें

स्थायी के मर्म पर अराजक ने उठाई हमेशा ही उँगलियाँ

in कविताएँ हिंदी कविता on मई 21, 2025 मई 21, 2025

कविताएँ :: हिमांशु विश्वकर्मा

नीचे उतरना किसी भी चढ़ाई का सबसे कठिन हिस्सा था

in उद्धरण गद्य on मई 16, 2025 मई 16, 2025

कार्सन मैक्कुलर्स के उद्धरण :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : सरिता शर्मा

जंग से बेज़ारी की नज़्में

in कविताएँ भारतीय कविता हिंदी कविता on मई 14, 2025 मई 14, 2025

नज़्में :: तसनीफ़ हैदर

अकेला होने से भी ज़्यादा भयानक हैं कई और चीज़ें

in कविताएँ विश्व कविता on मई 9, 2025 मई 15, 2025

चार्ल्स बुकोवस्की की कविताएँ :: अनुवाद : योगेश कुमार ध्यानी

भारी कविता कमज़ोर रीढ़ पर नहीं उतरती

in कविताएँ हिंदी कविता on मई 8, 2025 मई 8, 2025

कविताएँ :: विवेक भारद्वाज

दोहरी हुई नदियों के विरुद्ध हमें विद्रोह घोषित कर देना चाहिए

in कविताएँ तस्वीरें हिंदी कविता on मई 7, 2025 मई 7, 2025

कविताएँ :: धर्मेश

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COPYRIGHT © 2013-2025. सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पत्रिका का कोई भी हिस्सा किसी भी रूप में या किसी भी माध्यम, जिसमें सूचना संग्रहण और सूचना संसाधन की विधियाँ सम्मिलित हैं, द्वारा प्रकाशक अथवा संपादकों की पूर्वानुमति के बिना पुनरुत्पादित नहीं किया जा सकता सिवाय एक समीक्षक के जो समीक्षा में संक्षिप्त अंशों को उद्धृत कर सकता है। प्रकाशित रचनाओं का कॉपीराइट लेखकों/अनुवादकों/कलाकारों का है।

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