कविता पर विस्वावा शिम्बोर्स्का ::
अँग्रेज़ी से अनुवाद : आग्नेय

विस्वावा शिम्बोर्स्का

निम्नांकित पंक्तियां मूल रूप में पोलिश समाचार-पत्र  ‘लिटरेरी लाइट’ में प्रकाशित स्तंभ से चयनित हैं. इस स्तंभ में प्रख्यात कवयित्री विस्वावा शिम्बोर्स्का उन व्यक्तियों के पत्रों का उत्तर देती थीं जो कविता लिखना चाहते थे. शिम्बोर्स्का के दिए उत्तरों का अनुवाद पोलिश से अंग्रेजी में क्लेअर कैवेना ने किया है. वे थोड़े-से संपादित रूप में 17 अप्रैल 2006 को ‘पोएट्री फाउंडेशन’ के जर्नल्स खंड में प्रकाशित हुए. शिम्बोर्स्का का देहांत 1 फरवरी 2012 को हुआ.

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शेमिश से हेलिओदार :

तुमने लिखा है, ‘‘मैं जानता हूं कि मेरी कविताओं में अनेक दोष हैं, तो क्या हुआ मैं उनको ठीक करने के लिए रुकने वाला नहीं हूं.’’

ओ हेलिओडार, ऐसा क्यों? शायद! इसलिए कि तुम कविता को पवित्र समझते हो? या तुम उसे मामूली समझते हो? कविता के साथ दोनों तरह का बर्ताव करना गलत है. सर्वाधिक बुरा यह है कि वह एक नौसिखिए कवि को अपनी कविताओं पर काम करने की जरूरत से मुक्त कर देती है. अपने परिचितों से यह कहना सुखद और पुरस्कृत लगता है कि एक चारण मनोभाव ने हमें शुक्रवार की शाम 2.45 बजे अपनी गिरफ्त में ले लिया था और हमारे कानों में रहस्यमय भेद उत्कंठापूर्वक फुसफुसा रहे थे कि हमारे पास मुश्किल से उन पर ध्यान देने का समय था. लेकिन घर में बंद दरवाजों के पीछे श्रमपूर्वक उन बाह्यजगतीय कथनों को सुधारा गया, काटा गया और संशोधित किया गया. मनोभाव मनोरम और बांके होते हैं, लेकिन कविता का एक गद्यात्मक पक्ष भी होता है.

पोजनैन से एच.ओ., एक भावी अनुवादक :

एक अनुवादक मात्र पाठ के प्रति निष्ठावान रहने के लिए कृतज्ञापित नहीं है. उसके शिल्पगत रूप को बनाए रखते हुए और जहां तक संभव हो सके, उस युग-बोध और शैली को पूर्ण रूप से सुरक्षित करते हुए वह कविता के सौंदर्य को उद्घाटित करे.

स्ताराव्होइचा से ग्रज़याना :

अपने पंख उतार दें और अपने पैरों पर खड़े होकर लिखने की कोशिश करें, क्या यह हम करेंगे?

वारसा से के.जी. कर :

तुम्हें एक नई कलम की जरूरत है जिसका तुम उपयोग कर रहे हो, उससे अनेक गलतियां हो रही हैं. वह अवश्य विदेशी है.

निपोवोयिमस से पेगासस :

तुमने तुक में पूछा है, क्या जीवन सिक्का बनाता है? मेरे शब्दकोश में उसका उत्तर नकारात्मक है.

बायतम से के.के. :

तुम मुक्त छंद की कविता से धमा-चौकड़ी की तरह पेश आते हो, लेकिन कविता (हम जो भी कुछ कहें) सदा एक खेल ही रहेगी. जैसा कि हर बच्चा जानता है, सारे खेलों के कायदे होते हैं, तो वयस्क यह क्यों भूलें?

रादोम से पुष्ज़का :

बोरियत का भी जोश से भरकर वर्णन किया जा सकता है. उस दिन जब कुछ नहीं हो रहा होता है, कितनी सारी चीजें होती रहती हैं उस दिन?

वारसा से एल.के. बोएस्वाव :

तुम्हारी अस्तित्वमूलक व्यथा थोड़ा जल्द ही हल्के तरीके से आ गई. हमारे मन में पर्याप्त हताशा और अवसादमयी गहनताएं हैं. प्रिय थामस ने कहा है : (और कौन हो सकता है मॉन के अतिरिक्त) गहन विचारों को हमें प्रफुल्लित करना चाहिए.

तुम्हारी स्वयं की कविता ‘समुद्र’ पढ़कर ऐसा लगता है कि हम किसी छिछले पोखर में डुबकियां लगा रहे हैं. अपने जीवन को एक ऐसे अनोखे जोखिम की तरह सोचो जो तुम्हारे साथ हुआ है. इस समय मेरी यही सलाह है.

वारसा से ही मारेक :

हमारी एक धारणा है कि वसंत के बारे में स्वयं सारी कविताएं खारिज हो गई हैं. अब यह कविता का कोई विषय नहीं रहा, वह (कविता) स्वयं जीवन में पल्लवित हो रही है, यद्यपि ये दो अलग प्रश्न हैं.

व्रोतस्वा के निकट से बी.आई. :

सीधे-सीधे कहने का भय, प्रत्येक वस्तु को रूपक में ढाल देने के तकलीफदेह निरंतर प्रयास, प्रत्येक पंक्ति में यह साबित कर देने की एक सतत जरूरत कि तुम कवि हो. ये ऐसी चिंताएं हैं जिससे प्रत्येक नवोदित कवि घिरा है. उनका निदान है, यदि समय पर उनकी पहचान कर ली जाए.

पोजनैन से जेड.बी.के. :

तुमने अपनी तीन छोटी कविताओं में इतने भव्य शब्दों को निचोड़ लिया है जिनको अनेक कवि ऐसा अपने जीवन भर में नहीं कर पाते हैं. पितृभूमि, सत्य, स्वाधीनता, न्याय जैसे शब्द सस्ते में नहीं आते हैं… उनमें वास्तविक रक्त बहता है, जिनको स्याही से लिखकर जालसाजी नहीं की जा सकती.

नोवीए तर्ग से मिशेल :

रिल्के ने युवा कवियों को भारी-भरकम विषयों के प्रति चेताया था, क्योंकि वे अत्यधिक कठिन होते हैं और एक महान कलात्मक परिपक्वता की मांग करते हैं. उसने उनको सुझाया था कि वे अपने चारों ओर जो देखते हैं, कैसे वे अपना प्रत्येक दिन व्यतीत करते हैं, क्या खो गया है, क्या पाया गया है, इन सब पर लिखें.

उसने उनको उत्साहित किया था कि वे अपनी कला में उन चीजों को लाएं जिनसे हम घिरे रहते हैं, वे स्वजनों से और अपनी स्मृतियों में बसी वस्तुओं से बिंब ग्रहण करें.

उसने लिखा था : ‘‘यदि तुम्हें अपनी दिनचर्या विपन्न लगे तो जीवन को दोष नहीं देना. इसके लिए तुम स्वयं दोषी हो. तुम स्वयं इतने पर्याप्त कवि नहीं हो कि जीवन की संपदा को अनुभव कर सको.’’

यह सलाह तुम्हारे लिए चालू और मूढ़ लग सकती है. यही वजह है कि हम अपने पक्ष में विश्व साहित्य के सर्वाधिक गूढ़ कवि को ले आए… जरा देखो, उसने कैसे तथाकथित साधारण चीजों की प्रशंसा की है.

सोपोत से एवा :

अच्छा, एक वाक्य में कविता की परिभाषा. हम कम से कम पांच सौ परिभाषाएं जानते हैं, लेकिन कोई भी इतनी सटीक और व्यापक नहीं है कि उसे स्वीकार कर सकें. प्रत्येक अपने युग-बोध का आस्वाद देती है. एक जन्मजात संदेहवाद अपनी की गई परिभाषा को आजमाने से दूर रखता है. यद्यपि हमें कार्ल सैंडबर्ग की यह प्यारी-सी सूक्ति याद रखनी चाहिए कि ‘कविता एक डायरी है जिसको एक समुद्री जीव — जो भूमि पर रहता है और उड़ने की आकांक्षा करता है — लिखता है.’’ शायद वह किसी दिन सचमुच ऐसा कर ले.

स्लुपस्क से एल.के.बी.के. :

हम एक कवि से इससे अधिक चाहेंगे, जो स्वयं की तुलना आइकरस से करता है, जो उसकी नत्थी की गई लंबी कविता से अभिव्यंजित होता है. श्रीमान बी.के., आप इस तथ्य को भूल गए हैं कि आज आइकरस प्राचीन समय की अपेक्षा एक दूसरे तरह के दृश्य-पटल पर उदित होता है. कारों और ट्रकों से ढके राजमार्गों, विमानतलों, रनवेओं, महानगरों, कीमती आधुनिक बंदरगाहों और ऐसी ही अन्य भव्य चीजों से उसका साबका होता है. क्या कभी-कभी उसके कान के पास से कोई जैट-विमान नहीं उड़ जाता है?

क्राकोव से टी.डब्ल्यू. :

साहित्यिक कृतियों के सौंदर्यात्मक विश्लेषण पर स्कूलों में कोई समय नहीं बिताया जाता. ऐतिहासिक संदर्भों के साथ उनके केंद्रीय कथानकों पर ही सारा जोर रहता है. यद्यपि यह ज्ञान आवश्यक है, लेकिन उसके लिए यह पर्याप्त नहीं है, जो एक अच्छा स्वतंत्र पाठक होना चाहता है. रचनात्मक आकांक्षा रखने वाले की तो बात ही नहीं करें.

हमारे युवा संवाददाताओं को आघात लगता है जब युद्धोत्तर वारसा के पुनर्निर्माण और वियतनाम की त्रासदी पर लिखी उनकी कविताएं अच्छी नहीं हों. उनको यह पूरा विश्वास होता है कि सम्मानजनक इरादे काव्य-रूपों से पहले आते हैं. लेकिन अगर तुम्हें एक अच्छा मोची बनना है, तो इतना ही पर्याप्त नहीं है कि तुम मानवीय पैरों के प्रति उत्साहित हों. तुम्हें अपने चमड़े, अपने औजारों को जानना होगा और एक सही बनावट को चुनना होगा. इसी तरह अन्य चीजों को भी. यह बात कलात्मक सृजन के लिए भी यह सच ठहरती है.

लास्की से बी.आर.के. :

गद्य में लिखी तुम्हारी कविताएं ऐसे महान कवि के व्यक्तित्व से ओत-प्रोत हैं, जो मदिरा से उत्पन्न सुख-बोध की स्थिति में विलक्षण रचनाएं करता है. हम एक अजीब अनुमान लगा सकते हैं कि हमारे मन में किसका नाम है. लेकिन अंतिम विवेचना में ये नाम नहीं होते हैं जिनसे हमें सरोकार होता है. हालांकि यह एक भ्रामक विश्वास है कि मदिरा लेखकीय कर्म को सहज करती है, कल्पना को साहसिक और व्यंग्यों को धारदार बनाती है और कवि के मनोभावों को उत्तेजित करने के लिए, अन्य उपयोगी कार्यों को भी संपन्न करती है.

मेरे प्रिय श्रीमान के., न तो इस कवि ने या न हमसे व्यक्तिगत रूप में परिचित अन्य कवि ने या और न किसी कोई कवि ने कभी मदिरापान के विशुद्ध प्रभाव से कोई महान रचना की है. सारी अच्छी कृतियां यातनाप्रद, पीड़ादायक संयम से, बिना सिर में होती हुई बजबजाहट के, उद्गमित होती हैं.

वय्सपिरानस्की ने कहा था : ‘‘मुझे विचार मिलते हैं, लेकिन वोदका के बाद मुझे सिरदर्द भी होने लगता है.’’ यदि कवि मदिरापान करता है तो वह एक कविता और दूसरी कविता के बीच में करता है. यह एक नग्न यथार्थ है.

यदि मदिरा महान कविता का उन्नयन करती है, तब तो हमारे देश का हर तीसरा नागरिक कम से कम होरेस होता. इस प्रकार हमें विवश होकर एक और दूसरे लीजेंड को विस्फोटित करना पड़ा. मैं आशा करती हूं कि तुम इस विस्फोट से बिना किसी चोट या घाव के उभर लोगे.

वारसा से ई.आई. :

संभवतः तुम गद्य से प्रेम करना सीख सकते हो.

सीय्रादज़ से इस्को :

सचमुच, जीवन में युवा होना एक रहस्य भरा समय होता है. यदि युवापन की कठिनाइयों में लेखकीय महत्वाकांक्षाओं को जोड़ लें तो उनका सामना करने के लिए उसके पास असाधारण रूप से एक मजबूत संरचना होनी चाहिए. उसके घटकों में जिद, कर्मनिष्ठता, व्यापक पठन, कौतुकता, पर्यवेक्षण, स्वयं से दूरी, दूसरों के प्रति संवेदनशीलता, एक आलोच्य मानस, हास्य-बोध अवश्य शामिल होने चाहिए. इसके साथ ही एक ऐसा चिरस्थायी विश्वास कि इस संसार को बने रहने की पात्रता है. और अब तक की तुलना में वह और अधिक भाग्यशाली हो. तुम्हारे प्रयासों से यही एकमात्र संकेत मिलता है कि तुम लिखना चाहते हो और उपर्युक्त वर्णित और कोई गुण नहीं है. तुमने अपने ही लिए सृजन किया है.

ऊज़ से काली :

इस ग्रह की भाषा में सर्वाधिक महत्वपूर्ण शब्द क्यों है, संभवतः अन्य मंदाकानियों में भी यही हो.

स्कारसको से को पॉलजेट :

तुमने जो कविताएं भेजी हैं, उनसे तो यही लगता है कि तुम गद्य और पद्य के प्रमुख अंतर को समझने में विफल हो. उदाहरणार्थ : तुम्हारी ‘यहां’ शीर्षक वाली कविताएं, मात्र एक कमरे और उसमें रखे हुए फर्नीचर का मामूली-सा गद्यात्मक वर्णन हैं. गद्य में ऐसे वर्णन एक विशिष्ट कार्य करते हैं :

वे होने वाली घटनाओं के लिए एक मंच तैयार करते हैं. पल भर में दरवाजा खुलेगा, कोई आएगा और कुछ घटित होगा. कविता में वर्णन स्वयं घटित होता है. सब कुछ महत्वपूर्ण और अर्थवान है : बिंबों का चयन, उनका पदस्थापन, शब्दों में उनका आकार लेना. एक साधारण से कमरे का वर्णन हमारी आंखों के सामने उस कमरे की खोज हो जाना और उस वर्णन में जो संवेग अंतर्निहित हैं, पाठकों का उसमें सहभागी हो जाना. नहीं तो, गद्य गद्य बना रहेगा— तुम कितना भी कठोर प्रयास करो अपने वाक्यों को तोड़-फोड़कर पद्य की पंक्तियों में बदलने का. और, सबसे बुरा यह है कि उसके बाद कुछ भी नहीं होता है.

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