कविताएँ :: सोमेश शुक्ल
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पेड़ और पत्तों की सहमति से आता है पतझड़, पेड़ और पत्तों की सहमति से ही विदा लेता है
कविताएँ :: जितेंद्र सिंह
अगम्य अँधेरे में वह खड़ा है शांत
कविताएँ :: गोविंद निषाद
जीवन मथता है मुझे अहर्निश और संभव करता है एक सच
कविताएँ :: मधु बी. जोशी
रात हमेशा से दो तारीख़ों का मसला है
कविताएँ :: यतीश कुमार
जैसे अनंत सागर में कोई तूफ़ान पानी मथता है
कविताएँ :: अंचित