सुबोध सरकार की कविताएँ :: बांग्ला से अनुवाद : अमृता बेरा
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हमारा मर्म हमारे जीवन का शिल्प है
देवारति मित्र की कविताएँ :: बांग्ला से अनुवाद : बेबी शॉ
घर की शर्म को घर में ही रहने दो
चैताली चट्टोपाध्याय की कविताएँ :: बांग्ला से अनुवाद : जोशना बैनर्जी आडवानी
मैं वहाँ लौट आता हूँ जिस जगह से मैं संबद्ध हूँ
विजय नाम्बिसन की कविताएँ :: अनुवाद और प्रस्तुति : शिवम तोमर
पृथिवी पर एक बच्चे की लाश
कविताएँ :: शिवदीप
संजीदा नज़र आना कितना ज़रूरी है अपनी ज़ात के फक्कड़पन और ना-हमदर्दी को ज़िंदा रखने के लिए
ख़ालिद जावेद की नज़्में :: उर्दू से लिप्यंतरण : मुमताज़ इक़बाल