कुलदीप किप्पी की कविताएँ ::
डोगरी से अनुवाद : कमल जीत चौधरी

कुलदीप किप्पी

फोहाड़ा1मंदीला/कूप/भूसा-घर

मुझे उधार के नाड़2बाजरे/मक्की के सूखे डंडे की ज़रूरत नहीं है
मैंने यथा समय
यथा ज़रूरत
काँस काटकर रख लिया है…
मुझे आता है
तिनकों को तरतीब से लगाना
सुब्बा3धान की पराली या मुंज से बटी रस्सी बटना
उसे निपुणता से फेरकर
फोहाड़ा बनाना
अपने कल के लिए तूड़ी4भूसा सँभालना

छुट्टे जानवर
तुम इसका कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे
मैंने अपने फोहाड़े के इर्द-गिर्द
काँटों के झाड़ का ऐसा घेरा बाँधा है
जो तुम्हारी पीठ के मंसूबों को
लीरो-लीर5चीथड़ा-चीथड़ा करने के लिए काफ़ी है।

बची हुई है

आस-उम्मीद
चाव-रीझ से
हाथ थमाया
हाथ काट लिया गया
गले में उंगलियाँ डालकर मारने की
कोशिश भी जारी है।

झूठे वादे
आंगिक-वाचिक
और बेड़ियाँ और मुखौटे…
मगर बचा हुआ है दूसरा हाथ
दो सौ छह हड्डियाँ
लाखों नसें
और उबाल और आलिंगन
और टुंडे हाथ की कोंपल एक
बची हुई है।

कोने-अंतरे की कविता

हल की फाल पैनी
जुआ मज़बूत
बैल सुघड़ हों
तो भी जोत्तरा6अवधि-विशेष में बैलों से की गई जुताई लगाते हुए
कोने छूट जाते हैं

इनकी गुड़ाई करके
जो इन्हें जोते गए खेत में मिला लेता है
उस किसान से सीखो :
फावड़े के बिना कोई भी सृजन पूरा नहीं होता।

पत्नी

मेरी पत्नी
मेरे बिखरे काग़ज़ सँभालती रहती है
यह सोच कि
क्या पता किस काग़ज़ पर कोई
ज़रूरी कविता हो।

कविता और पत्नी दोनों
समानांतर हैं
उस पटरी की तरह
जिस पर जीवन की रेल चलती है
स्टेशन कोई भी आए
मैं चढ़ूँ या उतरूँ
मेरे लेखन में पत्नी का योगदान बेमिसाल है
कविता उसके कार्यक्षेत्र से बाहर है
मगर फिर भी वह इसके क्षेत्ररक्षण में डटी रहती है।

लाज़िमी

वेदना जब फेफड़ों की मेड़ तोड़ दे
हर बीच की दूरी में
जब आदमी एक खाई हो जाए
आँखें टिच बटन हो जाएँ
फ़सली बटेरे शोर करें
कुत्ते रोएँ
बिल्लियाँ विलाप करें
फ़सलें अपने रखवालों से डरें
रखवाले उजाड़ करने वाले जानवरों के
चरणों में लोटते दिखें
ओंठ सिल जाएँ
जीभ कील दी जाए
रक्त निचुड़ता जाए
तो कविता होना लाज़िमी है।


कुलदीप किप्पी डोगरी गीतकार-ग़ज़लकार और कवि हैं। उनका जन्म 15 अगस्त 1976 को कृष्णपुर मनवाल (जम्मू-कश्मीर) में स्थित छम्ब-विस्थापित-शरणार्थी कैम्प में हुआ। वह लगभग ढाई दशक से लिख रहे हैं। ‘कोसा पानी’ शीर्षक से इनका एक ग़ज़ल-संग्रह प्रकाशित है। एक गीत-संग्रह प्रकाशनाधीन है। इसके अलावा कुछ गीत आकाशवाणी जम्मू से रिकॉर्ड हो चुके हैं। स्वयं भी बहुत अच्छा गाते हैं। नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं। उनसे k9419274987@gmail.com पर बात की जा सकती है। कमल जीत चौधरी से परिचय के लिए यहाँ देखिए : कमल जीत चौधरी 

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