कविताएँ :: आनंद बलराम
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जियो लेकर प्यार का आधार
कविताएँ :: सुघोष मिश्र
किसी के जीवित रहने की याद भी ज़्यादा दिनों तक जीवित नहीं रहती
कविताएँ :: अमर दलपुरा
हर ओर अँधेरा लगता जग ओछा
कविताएँ :: हरे प्रकाश उपाध्याय
धान की डेहरी में मनही की तरह सोता है मेरे भीतर देवरिया
कविताएँ :: विवेक कुमार शुक्ल
मैं चाहता हूँ हर चीज़ का विकल्प होना, मैं चाहता हूँ जल्दी ही निर्विकल्प होना
कविताएँ :: देवी प्रसाद मिश्र