आलेख :: माज़ बिन बिलाल
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‘हर सहूलत अपनी ज़ात से नई पेचीदगियों को जन्म देती है’
‘हर सहूलत अपनी ज़ात से नई पेचीदगियों को जन्म देती है’
जहाँ पर रची जाती हैं भ्रम की गाथाएँ
अनुराधा पाटिल की कविताएँ :: मराठी से अनुवाद : सुनीता डागा
कविता जमती है भुरभुरी ज़मीन पर
रामस्वरूप किसान की कविताएँ :: राजस्थानी से अनुवाद : राजेंद्र देथा
अधूरा प्रयास करने वालों की भीड़ में
तरुणा खत्री की रेखाकृतियाँ और कविताएँ :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : लता खत्री
दुनिया में परोपकार की नहीं, बल्कि न्याय की कमी है
मैरी वोलस्टोनक्राफ़्ट के कुछ उद्धरण :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : सरिता शर्मा