सुभाषितरत्नभाण्डागारम् :: प्रस्तुति : गार्गी मिश्र
‘कोरोना कविता का विषय नहीं’
बातें :: कृष्ण कल्पित से अविनाश मिश्र
जिस्म के साथ आख़िरी लम्हे
नज़्में :: शारिक़ कैफ़ी
मैं वृक्ष पर लगे कटहल की तरह हूँ
हो जुआन हुआंग की कविताएँ :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : प्रचण्ड प्रवीर
पहुँचना ही संक्रमण है शायद
कविताएँ :: आयुष झा
मैंने तुम्हें सुना और एक पेड़ हो गया
कविताएँ :: नरेन सहाय