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लहरें

रात एक अच्छी उर्वर ज़मीन है—कविताओं को बोने के लिए

in कविताएँ विश्व कविता on जुलाई 4, 2024 जुलाई 4, 2024

होर्हे लुई बोर्हेस की कविताएँ :: अनुवाद और प्रस्तुति : अंचित

क्रांतिकारी होने की हर छलाँग का एक पैर रजाई के अंदर है

in कविताएँ हिंदी कविता on जुलाई 3, 2024 जुलाई 3, 2024

कविताएँ :: निशांत कौशिक

मैं बेहोश होने से ज़्यादा बेहोश होने की ‘वजह’ हो जाता हूँ

in कविताएँ भारतीय कविता हिंदी कविता on जुलाई 2, 2024 जुलाई 2, 2024

कविताएँ :: भूपिंदरप्रीत

एक स्त्री कितनी प्रेम-कविताओं का भार सह सकती है

in कविताएँ हिंदी कविता on जुलाई 1, 2024 अक्टूबर 27, 2025

कविताएँ :: मनोज कुमार झा

मेरे जीवन की शुरुआत और अंत तो स्पष्ट थे, मुझे बस बीच के हिस्से पर क़ाबू पाना था

in उद्धरण गद्य on जून 27, 2024 जून 27, 2024

ओउज़ अताय के कुछ उद्धरण :: तुर्की से अनुवाद और प्रस्तुति : निशांत कौशिक

द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनने के बाद

in कविताएँ हिंदी कविता on जून 26, 2024 जून 26, 2024

कविता :: बेबी शॉ

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