येहूदा आमिखाई की कविताएँ ::
अँग्रेज़ी से अनुवाद : विनोद चंदोला

येहूदा आमिखाई | तस्वीर सौजन्य : uvm.edu

जंग में क्या सीखा मैंने

क्या सीखा मैंने जंग में :
बाँहें और पैर डुलाते वक़्त पर क़दमताल करते चलना

जैसे कि पम्प उलीचते हों कोई ख़ाली कुआँ।

चलना किसी क़तार में और बीच में अकेला होना,
तकियों, गद्दों में किसी माशूक़ दिलरुबा का जिस्म खोजना,
और चिल्लाना “माँ”, जब वह सुन न सकती हो,
और चिल्लाना “ईश्वर”, जबकि मैं उसमें विश्वास नहीं रखता,
और गर मैं उस पर यक़ीन रखता भी
मैंने न बताया होता उसे कुछ जंग की बाबत
जैसे तुम नहीं बताते किसी बच्चे को बड़ों के ख़ौफ़ों के बारे में।

और क्या सीखा मैंने। मैंने सीखा पीछे हटने के लिए कोई राह बचाए रखना।
ग़ैरमुल्कों में लेना किराये पर कमरा किसी होटल में
क़रीब हवाईअड्डे या रेलवे स्टेशन के।
और बारातघरों तक में
रखना नज़र हमेशा लाल रंग में “बाहर” इबारत चस्पाँ हो जिस पर
उस छोटे से दरवाज़े पर।
लड़ाई भी शुरू होती है
नाच के लिए ताल की थाप देते ढोलों की तरह और होती है ख़त्म
“पौ फटने के वक़्त फ़ौज पीछे हटेगी” के ऐलान के साथ। वर्जित प्रेम
और युद्ध, दोनों की कभी-कभी इस तरह होती है समाप्ति।

लेकिन इस सबसे अलग मैंने सीखी छल-बल की समझ,
अलग न दिखने की, पहचाने न जाने की,
अपने इर्द-गिर्द से भिन्न न होने की,
अपने प्यारों-चहेतों से भी नहीं।

वे सोचते रहें कि कोई झाड़ी या भेड़ हूँ मैं
कोई पेड़, परछाईं पेड़ की,
कोई शुब्हा, साया शुब्हे का,
कोई ज़िंदा मेंड़, मुर्दा पत्थर,
कोई मकान, कोना मकान का।

गर मैं होता कोई पैग़म्बर धुँधला देता ताब बीनाई की
और अँधियारे में ढक देता काले क़ाग़ज़ से अपना ईमान
जादू पर डाल देता पर्दा जालियों का।
और जब मेरा वक़्त आएगा, मैं ओढ़ूँगा छलावे का लिबास अपनी आख़िरत का आख़िरकार :
सुफ़ेदी बादलों की और ढेर सारा नील आसमानी
और सितारे अनगिन-बेशुमार।

स्रोत : ‘लाइव जर्नल’ पर संग्रहीत अँग्रेज़ी अनुवाद

ईश्वर की दया बनी रहती है किंडरगार्टन के बच्चों पर

ईश्वर की दया बनी रहती है किंडरगार्टन के बच्चों पर।
स्कूली बच्चों पर उसे दया आती है कुछ कम
और बालिग़ों पर वह ज़रा भी तरस नहीं खाता।
अकेला छोड़ देता है वह उन्हें,
कि कभी-कभार उनको चारों पंजों के बल रेंगना पड़ जाता है
जलती रेत में
प्राथमिक सहायता केंद्र तक पहुँचने के लिए
ख़ून से लथपथ।

लेकिन वह सच्चे प्रेमियों की निगहबानी करे शायद
करे उन पर करम, आसरा दे उन्हें
जैसे कोई पेड़ आम सैरगाह में किसी बेंच पर सोते
बूढ़े शख़्स को।

हम भी दें उन्हें शायद
करुणा के वे आख़िरी सिक्के
जो हमें माँ से विरासत में मिले
ताकि उनकी ख़ुशियाँ रखें सलामत हमें
अब भी और और दिनों में भी

स्रोत : स्टीवन मिचल का अँग्रेज़ी अनुवाद

बम का व्यास

बम का व्यास था तीस सेंटीमीटर
और उसके असर के घेरे का व्यास तक़रीबन सात मीटर,
चार मृतकों और ग्यारह घायलों के साथ।
गिर्द उनके, एक और बड़े घेरे में
दर्द औऱ वक़्त के, बिखरे हैं दो हस्पताल
और एक क़ब्रिस्तान। लेकिन युवती
जो शहर में दफ़नाई गई, आई थी
सौ किलोमीटर से भी ज़्यादा की दूरी से,
और बड़ा कर देती है इस घेरे को
और उसकी मौत का मातम करता एक अकेला आदमी
समंदर के पार बहुत दूर किसी देश के किनारे
पूरी दुनिया को मिला देता है इस घेरे के भीतर।

और मैं अनाथों की चीख़ों का ज़िक़्र तो नहीं ही करूँगा
जो पहुंचती है ऊपर ईश्वर की गद्दी तक और
उससे भी आगे, बनाती एक घेरा छोरहीन, ईश्वरविहीन।

स्रोत : हाना ब्लॉक का अँग्रेज़ी अनुवाद

मेरे पिता की मृत्यु

मेरे पिता यकायक छोड़कर अपने सारे ठिकाने-ठौर
चल पड़े दूर अपनी किसी अनजानी जगह की ओर

वह निकले थे अपने ईश्वर के यहाँ हाज़िरी भरने
कि आएगा वह छड़ी-लाठी लिए मदद हमारी करने

ईश्वर ने लिया ज़िम्मा, आ रहा जल्द ही कहकर
टाँगते हुए अपनी फतुई नए चाँद की खूँटी पर

मगर वापस नहीं जाने देता पिता को कभी ईश्वर
जो गए थे उसे लिवाने हमारी ख़ातिर यहाँ ज़मीं पर

स्रोत : ए.ज़ेड. फ़ोरमैन का अँग्रेज़ी अनुवाद


येहूदा आमिखाई | विनोद चंदोला

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