येहूदा आमिखाई की कविताएँ ::
अँग्रेज़ी से अनुवाद : योगेश कुमार ध्यानी

यरूशलम का प्यार
एक गली है जहाँ वे सिर्फ़ लाल मीट बेचते हैं
एक गली जहाँ वे सिर्फ़ कपड़े बेचते हैं
और इत्र बेचते हैं
और कोई दिन होता है
जब मुझे सिर्फ़ अपंग और अंधे दिखाई देते हैं
और वे जो कुष्ठ रोग से ढके हुए हैं
और ऐंठे हुए बदन वाले
और मुड़े हुए होंठ वाले लोग।
इधर वे घर बनाते हैं
और उधर वे तोड़ते हैं
इधर वे धरती में खुदाई करते हैं
और उधर वे आकाश में खोदते हैं
इधर वे बैठते हैं और उधर वे चलते हैं
इधर वे घृणा करते हैं
और उधर वे प्रेम करते हैं।
किंतु वह जो यरूशलम को
किसी सैलानी किताब या
प्रार्थना-पुस्तक के ज़रिये प्यार करता है
उसकी तरह है जो एक औरत को
संभोग-अवस्थाओं की नियमावली के ज़रिये प्यार करता है।
स्रोत : Love of Jerusalem
जंगली शांति
युद्ध-विराम की शांति नहीं
न ही भेड़िये और मेमने का दृश्य
बल्कि जैसी कि उत्तेजना के समाप्त होने के बाद हृदय में होती है
और तुम सिर्फ़ एक विशाल थकान की बात कर सकते हो
मैं जानता हूँ कि मैं मारना जानता हूँ
यह मुझे वयस्क बनाता है
और मेरा बेटा जो अपनी आँख खोलना
और बंद करना जानता है और माँ कहना
एक खिलौने वाली बंदूक़ से खेलता है
एक शांति
तलवारों को हल के फालों में
बदलने की बड़ी आवाज़ों के बिना
बिना शब्दों की
मज़बूत रबर-स्टैम्प के लगने की ध्वनि के बिना
इसे हल्का रहने दो, बहता-सा, सफ़ेद झाग की तरह
घावों के लिए बस थोड़ा-सा विश्राम
घाव भरने की बात कौन करता है?/
(अनाथों की हूक
एक पीढी से दूसरी पीढ़ी को सौंप दी जाती है
रिले रेस की तरह :
बैटन कभी नहीं गिरता।)
उसे जंगली फूलों की तरह आने दो
अचानक
क्योंकि मैदानों पर
होनी ही चाहिए :
जंगली शांति।
स्रोत : Wildpeace
संसार में आधे लोग
संसार में आधे लोग
दूसरे आधों से प्यार करते हैं
और आधे दूसरे आधों से नफ़रत
इन आधों और दूसरे आधों की वजह से
मुझे भटकते रहना होना
और अपने चक्र में बारिश की तरह
निरंतर बदलना
चट्टानों के बीच सोना
और जैतून के पेड़ों के तने की तरह असभ्य बढ़ना
चाँद को मुझ पर भौंकते हुए सुनना
और अपने प्रेम को चिंताओं से ढकना
और रेल की पटरी के मध्य
डरी हुई घास की तरह जमना
ज़मीन के अंदर एक छछूंदर की तरह रहना
और रहना होगा जड़ों के साथ
न कि शाखाओं के साथ
और अपने गालों को
देवदूतों के गाल पर नहीं महसूस करना
और पहली गुफा में प्यार करना
और धरती को थामे हुई
छड़ों के ऊपर तनी छतरी के नीचे
करना होगा अपनी पत्नी से विवाह
आख़िरी साँस और आख़िरी शब्द तक
बिना समझे
करना होगा अपनी मृत्यु का अभिनय
और घर के ऊपर लगाने होंगे ध्वज-स्तंभ
और नीचे बनानी होगी शरणगाह
और सिर्फ़ उन रास्तों से जाना जो लौटने के लिए बने हैं
गुज़रना होगा भयावह स्थानकों से—
बिल्ली, छड़, आग, पानी, क़साई,
बच्चे और मृत्यु के देवता के बीच से?
आधे लोग प्रेम करते हैं
आधे घृणा
और इस इतने अच्छे तरीक़े से मेल खाते हुए
आधों के बीच
कहाँ है मेरी जगह
किस दरार से देखूँगा मैं
मेरे सपनों की सफ़ेद आवासीय परियोजना
और रेत पर नंगे पैर दौड़ते धावकों को
या कम से कम टीले के बग़ल में
एक लड़की के रूमाल हिलाने को?
स्रोत : Half the People in the world
येहूदा आमिखाई [1924-2000] संसारप्रसिद्ध इज़राइली कवि-लेखक हैं। योगेश कुमार ध्यानी सुपरिचित हिंदी कवि-लेखक-अनुवादक हैं। ‘सदानीरा’ पर इस प्रस्तुति से पूर्व-प्रकाशित उनका अनुवाद-कार्य यहाँ देखिए : अकेला होने से भी ज़्यादा भयानक हैं कई और चीज़ें